आखिरी रात भवई, चरी नृत्य की प्रस्तुति
भास्कर न्यूज - कुंभलगढ़
कुंभाजी के दुर्ग पर फेस्टिवल की आखिरी रात गुरुवार को मयूर नृत्य व बरसाने की होली आधारित प्रस्तुतियों पर ब्रज-सा उल्लास छा गया। दुधिया रोशनी में नहाए मंच पर कलाकारों ने मयूर नृत्य व बरसाने की होली की जीवंत प्रस्तुति दी तो विदेशी पर्यटक भी झूम उठे। प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।
कार्यक्रम का आगाज पुष्कर के कालबेलिया कलाकार व उनके दल ने केसरिया बालम पधारो म्हारे देस...गीत से किया। इसके बाद बारां के एस. बी. गुजरावत के दल ने हाड़ौती अंचल का मशहूर चकरी नृत्य प्रस्तुत किया। अलवर से कच्छी घोडी कलाकार ने आकर्षक अलगोजा नृत्य की प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरी।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अलवर के फारुक मोहम्मद रहे, उन्होंने मुंह से बजाए जाने वाले वाद्ययंत्र भपंग पर लोगों को बांधे रखा। बाड़मेर के गौतम परमार एंड पार्टी की ओर से घुटना भवई व जीवनदास समीचा के तेरह ताली नृत्य पर भी खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम का समापन ब्रज अंचल के नयनाभिराम मयूर नृत्य से हुआ। भरतपुर के जितेन्द्र पाराशर व कलाकारों ने नृत्य में फूलों की होली खेली। थानाधिकारी प्रदीप हापावत उपस्थित थे।
लुइसा व पल्लवी की प्रस्तुति ने मोहा5
इससे पहले दोपहर को बाल नृत्यांगनाओं की प्रस्तुतियां हुई। आमेट की बाल नृत्यांगना लुइसा टेलर व राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित केलवाड़ा की पल्लवी उपाध्याय ने मैं तो मेले में जा आई रे डोलर चकरी में बैठ आई रे... पर नृत्य की प्रस्तुति दी तो देसी विदेशी पर्यटक झूमते नजर आए। दोनों नृत्यांगनाओं ने घूमर, कालबेलिया नृत्यों की प्रस्तुति से समां बांध दिया। बांदीकुई के बहरुपिया कलाकारों ने नारद, सेठ साहूकार के वेष धरे। बाड़मेर के लाल आंगी, बारां की चकरी नृत्य, पुष्कर के कालबेलिया नृत्य कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी।
रस्सा कशी, कुर्सी रेस, मेहंदी प्रतियोगिता हुई। विजेताओं को पर्यटन उपनिदेशक सुमिता सरोज, तहसीलदार गोपाल सिंह, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रहलादसिंह सोलंकी व कुबेर सिंह सोलंकी ने पुरस्कार वितरण किए।
कुंभलगढ़ . फेस्टिवल में गुरुवार रात भवई नृत्य की प्रस्तुति देती कलाकार।
कुंभलगढ़ फेस्टिवल : भरतपुर सहित अन्य जिलों के कलाकारों ने दी प्रस्तुति