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‘वैराग्य का प्रतीक है केशलोंच’

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - वल्लभनगर
ओस्तवाल समाज के नोहरे में मुनि संघस्थ पुण्य नंदी महाराज का केशलोचन हुआ। इस अवसर पर आचार्य सुकुमालनंदी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि शरीर के बालों को हाथों से उखाडऩा केशलोचन कहलाता है। जिस प्रकार खेत में किसान घास उखाड़ता है उसी प्रकार जैन साधु वैराग्य को धारण करने के लिए केशलोचन करवाता है। अहिंसा धर्म पालन के लिए यह मूलगुण को स्वीकार करना होता है। आचार्य श्री ने यह भी कहा कि केशलोचन बिना मुक्ति नहीं मिलती है। केशलोचन वैराग्य का प्रतिक है। जिसके तन में लंगोट नहीं उसके मन में कोई खोट नहीं होती है। उन्होंने कहा कि राग द्वेष पर विजय प्राप्त करना, मन के विकारों को जितना ही सच्ची तपस्या है। इसके बाद समाज के अध्यक्ष भेरूलाल जैन ने आचार्य शांतिसागर, आचार्य पद्मनंदी, आचार्य सुकुमालनंदी के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्ज्वलन किया। नावां सिटी की चमेली देवी द्वारा केश झेलने का सौभाग्य प्राप्त किया। केश विसर्जन व पिच्छिका अर्पण भंवरलाल लूणदिया ने किया। दिगंबर श्वेतांबर पंचों के निवेदन के बाद महावीर जयंती फतहनगर में होने की संभावना है।
सौभाग्य मुनि व मदन मुनि का फतहनगर में होगा मिलन
मावली - श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि व मदनमुनि का मिलन फतहनगर में होगा। सौभाग्य मुनि डूंगरपुर से सलूंबर, बंबोरा, भींडर, आकोला होते हुए 2 मई को फतहनगर पहुंचेंगे। इस दौरान वे यहां प्रवासरत मदन मुनि से भेंट करेंगे।