मजदूर की परवाह करे कौन!
भास्कर न्यूज - ब्यावर
‘साहब...मजदूरों को तो केवल मजदूरी से मतलब है! सुबह चांगगेट या पांच बत्ती से काम पर आ जाते है। जो साधन मिले, काम किया और मजदूरी लेकर घर की राह पकड़ते है!’ इसी सोच के साथ मजदूर रोजाना से घर से निकलते है। बीते दिनों तेजा चौक क्षेत्र में निर्माणाधीन भवन की छत ढहने से चार लोगों मौत होने के बाद भी मजदूर बगैर सुरक्षा बंदोबस्त काम करते रहे। काम के बदले भले ही पूरी मजदूरी मिलने का हक मिल रहा हों, लेकिन सुरक्षा इंतजाम, सिक्युरिटी किट जैसे साधनों से आज भी मजदूर वर्ग वंचित है। निर्माणाधीन मकानों में मजदूरों को सुरक्षा के अभाव में काम कर रहे है।
जिला मुख्यालय की जिम्मेदारी
उपखंड क्षेत्र में भवन निर्माण के दौरान मजदूरों की सुरक्षा से संबंधित शिकायत पर कार्रवाई जिला मुख्यालय से की जा सकती है। श्रमिक कल्याण कार्यालय में वेलफेयर संबंधी काम-काज किया जा सकता है। क्षेत्र में मजदूरों की सुरक्षा व अधूरे मापदंड संबंधी शिकायत पर अजमेर जिला मुख्यालय से ही कार्रवाई हो सकती है।
॥तेजा चौक क्षेत्र में निर्माणाधीन भवन में मृत मजदूरों की ओर से कोई क्लेम नहीं हुआ है। यदि मृतकों का योजना में पंजीयन है, तो पूरा लाभ दिलाया जाएगा। योजना में क्षेत्र के 15 हजार से ज्यादा श्रमिक जुड़े हुए हैं। पूरे दस्तावेजों के साथ दावा करने पर मजदूर के हित में विभाग कार्रवाई करेगा।’’
-जी.आर. गहलोत, श्रम निरीक्षक, ब्यावर।
॥मजदूर केवल मजदूरी और घर चलाने में ध्यान देते है। सरकार की योजना से कोई मतलब नहीं है। इस उम्र में भी घर-घर जाकर फार्म भरवाकर जमा करा रहा हूं। मजदूरों को फायदों के बारे में पता ही नहीं है।’’
-मोहम्मद उस्मान मिस्त्री, अध्यक्ष बिल्डिंग लेबर यूनियन, ब्यावर।
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