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कुल की रस्म के साथ मना बाबा अली शहंशाह का उर्स

8 वर्ष पहले
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नसीराबाद। बाबा अली शहंशाह मोहम्मद मुफीद उर्फ गेंदघर वाले बाबा का उर्स शनिवार को कव्वालियों और कुल की रस्म के साथ संपन्न हुआ। दरगाह परिसर में आयोजित कव्वालियों के कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार रात राजगढ़ भैरवधाम के मुख्य उपासक चंपालाल महाराज ने दरगाह की जियारत की और अमन चैन की दुआ मांगी।

कव्वालियों के कार्यक्रम में कपासन चित्तौड़ के कव्वाल सलीम साबरी और सरवाड़ शरीफ के जनाब इकबाल चिराग अजमेरी ने कव्वालियां प्रस्तुत कर श्रोताओं को रातभर बांधे रखा। कपासन शरीफ के कव्वाल सलीम साबरी ने दिल पर नबी के नाम का नशा, चांद तारे फलक कह रही जमीन, नबी है हमारे प्यारे नबी सुनाकर श्रोताओं को अपने से जोड़ा और सोना निकल रहा है। मोहम्मद के शहर में गाकर जायरीन को झूमने पर मजबूर कर दिया। सरवाड़ के कव्वाल इकबाल अजमेरी ने निगाहे करम गम के मारे है। हम, अल्लाह हू अल्लाह हू और अजमेर मेरी मंजिल, बगदाद मेरा ठिकाना कव्वालियां सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शनिवार सुबह कुल की रस्म के साथ बाबा अली शहंशाह गेंदघर वाले बाबा का उर्स संपन्न हुआ।