तहसील प्रशासन ने सुलझाया भूमि विवाद
भास्कर न्यूज - ब्यावर
बस स्टैंड के सामने स्थित जमीन के दो खसरों का विवाद मंगलवार को प्रशासन की पहल पर सुलझ गया। तहसील प्रशासन ने जमीन के नाप-चौप का आधार मौके पर स्थित मंदिर के समीप पुराने कुएं को माना। रिपोर्ट मिलने के बाद उपखंड प्रशासन ने इस बात की पुष्टि कर दी कि जिन दो खसरों के लिए शिकायत मिली थी, उन पर कोई अतिक्रमण नहीं है। उपखंड प्रशासन के इस निर्णय पर दोनों पक्षों ने रजामंदी जताई। मामले का शांतिपूर्ण हल निकलने के बाद प्रशासन ने राहत की सास ली। इससे पहले सोमवार को जमीन का नाप-चौप नहीं होने से यह तय नहीं हो पाया था कि संबंधित जमीन किस खसरे में स्थित है।
मालूम हो कि विश्व हिंदू परिषद की ओर से उपखंड अधिकारी भगवती प्रसाद को २५ जनवरी को ज्ञापन सौंपा गया था। विहिप जिलाध्यक्ष नितेश गोयल और जिलामंत्री सुरेश वैष्णव समेत अन्य पदाधिकारियों का आरोप था कि रोडवेज बस स्टैंड से सातपुलिया के बीच सरकारी खसरा संख्या ३८० व ३८१ पर एक व्यक्ति विशेष अतिक्रमण कर रहा है। विहिप पदाधिकारियों ने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्यवाही करने की मांग की थी।
उपखंड प्रशासन के आदेश पर तहसीलदार मदनलाल जीनगर ने गिरदावर व पटवारियों की टीम को मौके पर भेजकर मौका-मुआयना व आवश्यक जांच कराई। सोमवार शाम तक टीम यह तय नहीं कर पाई कि नाप-चौप के आधार ‘मुस्तकिल प्वाइंट’ किसे माने। इस समस्या के निराकरण के लिए तहसीलदार जीनगर समेत अन्य अधिकारी रात को भी मौके पर पहुंचे। आखिर में तहसील प्रशासन ने तय किया कि नाप के लिए मुस्तकिल प्वाइंट बस स्टैंड के सामने स्थित मंदिर के पीछे पुराने कुएं को माना जाए। मंगलवार सुबह टीम ने इसे आधार मानते हुए क्षेत्र की जमीन का नाप-चौप किया।
सुरक्षा के बंदोबस्त
कानून व शांति व्यवस्था के लिए सिटी थाना पुलिस का जाब्ता मौके पर मौजूद था। पुलिस उपाधीक्षक गोपीसिंह शेखावत भी मंगलवार दोपहर को मौके पर पहुंचे। उनकी मौजूदगी में तहसीलदार ने टीम को नाप-चौप के निर्देश दिए। पुलिस की मौजूदगी में तहसील प्रशासन ने नाप-चौप किया। इस दौरान पुलिस उप अधीक्षक ने दोनों पक्षों को मौके से हटा दिया। थोड़ी ही देर में तहसील की टीम ने नाप- चौप की प्रक्रिया पूरी की। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बात को लेकर रोष जताया कि जब प्रशासन ने मंगलवार दोपहर को नाप-चौप करवाने की प्रक्रिया करने का निर्णय लिया था तो मौके पर परिषद अधिकारियों को भी पहुंचना चाहिए था। लंबे इंतजार बाद परिषद आयुक्त ओपी ढीढवाल मौके पर पहुंचे। बाद में परिषद आयुक्त नजूल शाखा प्रभारी के साथ जमीन से संबंधित पत्रावली के साथ उपखंड अधिकारी के समक्ष पेश हुए। उपखंड अधिकारी कार्यालय में एसडीओ भगवती प्रसाद की अध्यक्षता में बैठक हुई। इससे पहले तहसील प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। साथ ही नगर परिषद प्रशासन ने संबंधित खसरे की पत्रावली भी प्रशासन को सौंपी। प्रशासन ने दोनों पक्षों को अपना निर्णय सुनाया। इस पर दोनों ही पक्षों ने अपनी रजामंदी दिखाई।
॥जिस जमीन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं को शिकायत थी, तहसील प्रशासन से उसका नाप-चौप करवा लिया गया। उपखंड अधिकारी की मध्यस्थता में दोनों पक्षों और नगर परिषद प्रशासन को तहसील प्रशासन की रिपोर्ट बता दी गई। दोनों पक्षों में शांतिपूर्ण माहौल में सहमति बन गई।’
गोपीसिंह शेखावत, पुलिस उप अधीक्षक, ब्यावर
॥उपखंड प्रशासन के आदेश पर संबंधित जमीन का नाप-चौप करवा लिया गया है। जिन खसरा संख्या की बात हो रही है वे दोनों ही खसरा सामाजिक कार्यकर्ताओं की बताई जमीन में नहीं है।’
मदनलाल जीनगर, तहसीलदार
राजस्व रिकॉर्ड में जिस जमीन का नापचौप करने के लिए तहसील प्रशासन नाप के लिए जिस प्वाइंट को आधार मानते हैं, वह सरकारी भाषा में ‘मुस्तकिल प्वाइंट’ कहलाता है। मुस्तकिल प्वाइंट राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कोई पुराना कुआं, पेड़, नदी, नाला या अन्य और कोई चिह्न भी हो सकता है।
क्या है ‘मुस्तकिल प्वाइंट’