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5 मिनट तक फंसी रही 6 जिंदगियां

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - ब्यावर
उदयपुर रोड बाइपास पर बुधवार दोपहर कंटेनर की नीचे दबकर चकनाचूर हुई कार में 5 मिनट तक 6 जिंदगियां फंसी रही। कंटेनर के वजन के साथ दबाव भी बढ़ता जा रहा था। जैसे-जैसे इनोवा की छत दब रही थी, वैसे-वैसे कार में सवार में सवार लोगों की सांसें थमती जा रही थी। कार के पिछले हिस्से से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं आने पर अशोक और संदेव को आवाज ही देते रहे। कार में बैठे सभी लोग अपनी जगह से हिल भी नहीं पा रहे थे। हाइवे के उस पार से लोगों के पहुंचने और मदद करने के बीच करीब पांच मिनट तक तक भगवान का नाम लेकर बाहर निकलने का जतन ही करते रहे। ड्राइवर के पास वाली सीट पर बैठे युवक राम ने अपनी फाटक के शीशे को हाथों से मार-मारकर तोड़ा। इससे उसके हाथों पर काफी चोटें आई। शीशा टूटने के बार पहले वह खुद बाहर निकला। इतने में दुकानदार भी वहां पहुंच गए गए और एक-एक करके सभी को बाहर निकाला लिया। इसके बाद इनोवा कार में सबसे पीछे की सीट पर बैठे अशोक व संदेव के शव ही बाहर निकल पाए। घायलों को एक निजी कार चालक ने तुरंत राजकीय अमृतकौर अस्पताल में भर्ती कराया।
कंटेनर उठाने में जेसीबी भी फेल : हाइवे की सर्विस रोड के किनारे पर 15 टन वजन के कंटेनर के नीचे कार करीब 1 घंटे तक दबी रही। दुर्घटना स्थल से महज दूरी पर एक प्राइवेट जेसीबी ने पहुंचकर कंटेनर की केबिन में फंसे चालक व खलासी को निकालने का प्रयास किया। पौन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों घायलों को बाहर निकाला जा सका। इसके बाद जेसीबी से कंटेनर को उठाने का प्रयास किया, लेकिन जेसीबी कंटेनर को हिला भी नहीं सकी। इसके बाद क्रेन, जेसीबी और ट्रेलर की सहायता से कंटेनर को 3-4 फुट ऊपर उठाया जा सका और दबी हुई कार को निकाल पाए।




ब्रिज अधूरा, एक सर्विस रोड भी बंद

उदयपुर रोड बाइपास चौराहे के महज 1 किमी दूरी पर सिक्सलेन पर बना ओवरब्रिज का काम अधूरा पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ब्रिज के सहारे गुजर रही सर्विस रोड भी चालू नहीं हो पाई है। ऐसे में केवल एक ही सर्विस रोड पर पर यातायात संचालित किया जा रहा है। तेजी आ रहे ट्रेलर का सर्विस रोड पर मुडऩे के दौरान ही संतुलन बिगड़ गया और इनोवा कार के ऊपर 15 टन वजनी कंटेनर गिर गया।



इनोवा कार की बैक सीट पर बैठा गौरव मौत के मंजर को भुला नहीं पाया। राजकीय अमृतकौर अस्पताल में भर्ती होने के बाद तक उसे दुर्घटना का भयानक मंजर आंखों के सामने मंडराता रहा। बीच वाली सीट पर बैठे नरेश राणा के भी गहरा सदमा लगा। एकेएच से उसे तुरंत रैफर कर दिया गया।

कार से निकल गई रक्तधारा : जेसीबी व क्रेन की मदद से कार को खड्डे से उठाकर सड़क पर रखा गया। इस बीच कार से खून की धार निकल पड़ी। सड़क पर खून ही खून बिखर गया था। पुलिसकर्मियों व लोगों ने शवों को चकनाचूर कार से बाहर निकाला। खून से लथपथ शवों पर कुछ लोगों ने अपने स्वेटर व जैकेट डालकर मानवता का परिचय दिया।

दो घंटे तक हाइवे पर लगा रहा जाम : हादसे के बाद सिक्सलेन ओवर ब्रिज से सटी सर्विस रोड का आवागमन अवरुद्ध हो गया। ओवरब्रिज के दोनों ओर दो घंटे तक हाइवे जाम रहा। करीब एक घंटे तक आवागमन रुकने से हाइवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई।

उठा लाया दुकान के औजार : उदयपुर रोड बाइपास पर कबानी का काम करने वाला शंकर लोहार तुरंत मौके पर पहुंच गया। अपनी दुकान के सारे औजार लेकर कार व कंटेनर की केबिन में फंसे जिंदा लोगों को भी बाहर निकालने में सहयोग किया। मौके पर मौजूद छात्र नेता अजय चंदेल ने भी गाडिय़ों में फंसे लोगों को बाहर निकालने में पूरा सहयोग दिया।

पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंपा : दुर्घटना में मौत का शिकार हुए दोनों को युवकों के शवों का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। मृतक अशोक व संदेव के परिजन जोधपुर से ब्यावर पहुंचे। सदर थाना पुलिस ने दोनों का पोस्टमार्टम करवाया और परिजन को सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने ट्रेलर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही घायलों के रिश्तेदार व परिचित मौका स्थल व अस्पताल में पहुंच गए। सूचना पर तहसीलदार मदनलाल जीनगर, पुलिस उपाधीक्षक गोपी सिंह शेखावत, सिटी थाना प्रभारी भूपेंद्र सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष चैनसुख हेड़ा, मंडल महामंत्री रमेश बंसल, पवन जैन, मनीष भंसाली, आर्ट ऑफ लिविंग के नरेश झंवर, जसपाल सिंह समेत कई परिचितों ने पहुंचकर घायलों की मदद की।



नहीं भुला पाया मौत का मंजर



कार सवारों

की आपबीती