गुजरवाड़ा व सरवर में अंधाधुंध अवैध खनन
भास्कर न्यूज - मदनगंज-किशनगढ़
बोराडा थाना क्षेत्र स्थित गुजरवाड़ा व सरवर गांव की सरहद पर अवैध खनन माफिया गिरोह सक्रिय है। अवैध खनन से गुजरवाड़ा में २० खानें ऐसी हैं जो १०० फीट तक गहरी हो चुकी हैं। इन जर्जर खानों से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। दूसरी ओर गिरोह इतना बेखौफ है कि मौके पर क्रेन, ट्रैक्टर कम्प्रेशर से बारूद का ब्लास्ट कर खनन कार्य कर रहा है। अवैध खनन माफिया गिरोह की ओर से अपने स्तर पर ही खान की सीमा भी तय कर खनन किया जा रहा है। इसको लेकर तीन दिन पहले इन माफिया गिरोहों के बीच खूनी संघर्ष भी हुआ। वहीं खनन लीज धारकों से गिरोह के लोगों के साथ कई बार मारपीट की घटनाएं भी हुई, जिनके मुकदमे पुलिस थाना बोराडा में दर्ज हैं, परंतु पुलिस की निष्क्रियता से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इन क्षेत्रों से प्रतिदिन २० डंपर से अधिक क्वाट्र्ज, फेल्सफार व अभ्रक का अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे सरकार को रोज ३० हजार से अधिक की राजस्व की हानि हो रही है। हैरत की बात है कि पुलिस इस बारे में अपने आप को अनजान बताती है।
खनन से सिलोरा व बोराडा में औद्योगिक क्षेत्र विकसित : अवैध खनन के कारण सस्ते कच्चे माल की उपलब्धता के कारण बोराडा में औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो गया है। बोराडा में १८ व सिलोरा में ६० से अधिक पाउडर फैक्ट्रियां हैं। अवैध खनन ट्रैक्टर में भरकर बोराडा में ही बेच दिया जाता है। वहीं सिलोरा इंडस्ट्रियल एरिया में लगी पाउडर फैक्ट्रियों में सस्ते दाम में बेच रहे हैं। दोनों जगह खान विभाग की ओर से जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। गौरतलब है कि प्रमाण पत्र धारी योग्य ब्लास्ट एक ब्लास्ट के ७८ रुपए वसूलता है, जबकि गिरोह के लोग १०० रुपए प्रति ब्लास्ट से काम कर रहे हैं।
नियम कायदों की उड़ा रहे धज्जियां
बोराडा क्षेत्र में चल रहा अवैध खनन माफिया विभाग के नियमों की धज्जियां भी उड़ा रहा है। नियमानुसार वैध खनन मालिकों को पर्यावरण को लेकर कई तरह की सावधानियां और पालना करनी पड़ती है, लेकिन अवैध खनन करने वालों को ऐसे किसी नियम से कोई लेना-देना नहीं है। दूसरी ओर, नियमानुसार खान पर काम करते समय मजदूरों की सुरक्षा के लिए फस्र्ट एड बॉक्स व अन्य उपचार के साधन होने चाहिए, पर यहां ऐसी कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होती।
‘सुनवाई नहीं करती है पुलिस’
एक मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गुजरवाडा में क्वाट्र्ज फेल्सफार व अभ्रक का अवैध खनन हो रहा है। खानें इतनी गहरी और जर्जर हो गई हंै कि कभी भी हादसा हो सकता है। वह भी मजदूरी करते समय हादसे का शिकार हो चुका है। पुलिस में शिकायत करने पर सुनवाई नहीं होती। उसने बताया कि अवैध खनन करने वालों के साथ पुलिस की मिलीभगत है। इस कारण कार्रवाई के समय अवैध खनन स्थल पर पहले ही सूचना पहुंच जाती है और इस कार्य में लगे लोग भाग जाते हैं।
‘पुलिस पर असहयोग का आरोप झूठा: बोराडा थाने के एसएचओ दिनेश चौधरी ने बताया कि पुलिस पर लगाया गया असहयोग का आरोप झूठा है। पुलिस जब कार्रवाई करने जाती है तो ग्रामीण भाग जाते हैं या मवेशी चराने लगते हैं। जमीन को चरागाह में होना बताते हैं। पूर्व में कुछ लोगों को पकड़ा भी था, पर वे मवेशी चराने की बात कहते हैं। कोई भी जांच करवा लें।
अवैध खनन माफिया गिरोह ने अपने स्तर पर ही तय ली खनन की सीमा, आपस में होते हैं खूनी संघर्ष
क्रेन, ट्रैक्टर व कम्प्रेशर से बारूद का दिनदहाड़े होता है ब्लास्ट, पुलिस की भूमिका पर सवाल
प्रतिदिन २० डंपर से अधिक क्वाट्र्ज ,फेल्सफार व अभ्रक के अवैध खनन से राज्य को रोज ३० हजार की हानि