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अस्पताल में बेकार पड़ी लाखों की मशीनें

8 वर्ष पहले
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ब्यावर. उपखंड के सबसे बड़े राजकीय अमृतकौर में कई उपकरण सालों से देखरेख के अभाव में बेकार पड़े हैं। आज भी यहां आने वाले मरीजों को कई सुविधाओं का उपकरण होते हुए भी लाभ नहीं मिल पा रहा। सालों पहले अस्पताल में आई एबीजी और एक्सरे मशीन अस्पताल के एक कमरे की शोपीस बन कर रह गई है। दुर्घटना में घायल होने वाले मरीजों का ट्रॉमा वार्ड में ही एक्सरे की सुविधा उपलब्ध करवाने की उद्देश्य से ट्रॉमा वार्ड के समीप ही एक्सरे मशीन लगाई गई, लेकिन देखरेख और कर्मचारियों के अभाव में ये मशीन एक कमरे में धूल फांक रही है।

सॉल्यूशन के अभाव में बंद पड़ी एबीजी मशीन : अस्पताल में भर्ती इंडोर मरीजों की सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड की जांच करने के लिए लगभग चार साल पहले मुख्यमंत्री सहायता कोष से एबीजी मशीन उपलब्ध करवाई गई। शुरूआत में यहां मरीजों को जांच सुविधाओं का लाभ मिलता रहा, लेकिन पिछले दो साल से सॉल्यूशन के अभाव में ये मशीन बंद पड़ी है। अब मरीजों को ३५० रुपए के एबीजी जांच बाहर करवानी पड़ रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना पर सवालिया निशान लगता है।

डेढ़ साल से खराब डेंटल चेयर : एकेएच में दो दंत चिकित्सक तैनात हैं, लेकिन डेंटल चेयर खराब होने के कारण पिछले डेढ़ साल से मरीजों को सिर्फ परामर्श मिल रहा है, उपचार नहीं। आरएचडीपी से मिली डेंटल चेयर को खराब हुए डेढ़ साल का लंबा वक्त गुजर चुका है, लेकिन न तो इसकी मरम्मत हो पा रही है और न ही नई डेंटल चेयर खरीदी जा रही है। ऐसे में यहां आने वाले डेंटल मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पूरी जांच नहीं हो रही : एबीजी मशीन के विशेषज्ञ ने बताया कि मशीन में एक बार सॉल्यूशन डालने के बाद उसे निकाला

नहीं जा सकता। मशीन में कम से कम 10 जांच प्रतिदिन होनी चाहिए, लेकिन अस्पताल में अधिकतम प्रतिदिन २ से ४ जांच ही होती। जिस कारण सॉल्यूशन सूख जाता और खराब हो जाता। इस कारण मशीन को बंद करना पड़ा। अब सॉल्यूशन के अभाव में इसे बंद करना पड़ा।

॥डेंटल चेयर के लिए स्वास्थ्य निदेशक को लिख कर इसकी मांग की जा चुकी है। उम्मीद है अस्पताल को जल्द ही नई डेंटल चेयर मिल जाएगी। एबीजी मशीन के लिए सॉल्यूशन का आर्डर दिया हुआ है। जैसे ही सॉल्यूशन मिलेगा, जांच फिर से शुरू हो जाएगी।’
डॉ. दिलीप चौधरी,
पीएमओ, अमृतकौर अस्पताल