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पति की मौत के 8 साल बाद मिली लॉकर की चाबी
सज्जनगढ़ ((बांसवाड़ा)) - लीला लबाना के लिए गुरुवार का दिन खास था। उसकी आंखों में पति के मौत का जितना गम था, उतनी ही कानून और समाज की लंबी लड़ाई के बाद जीत की खुशी। आखिर क्यों ना हो, वह 8 साल से वह लंबी लड़ाई लड़ रही थी।
गुरुवार को बैक ने उसके पति के लॉकर की चाबी बैंक मैनेजर ने उसे सौंपा तो उसका आत्मविश्वास जाग उठा। लॉकर से 3 लाख 49 हजार रुपया कैश व 9 किलो 352 ग्राम चांदी के जेवर मिले, जो उसके पति ने संजोकर रखे थे। यानी कुल आठ लाख रुपए की नकदी और आभूषण उसे मिले। समाज और कानून की 8 साल लंबी लड़ाई लडऩे के बाद गुरुवार को एक महिला को उसका हक मिला। बैंक ने पति की मौत के बाद पत्नी को उसके संपत्ति का अधिकारी मानते हुए उसे पति की लॉकर की चाबियां सौंपी। संघर्ष सज्जनगढ़ लीला नाम की महिला का है। उसके पति पृथ्वी की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद उसे बेघर कर दिया गया था। उसको उसके पति की संपत्ति और उसके लॉकर की नांबिया से भी महरूम कर दिया गया। महिला ने पहले तो समाज से संघर्ष किया। इसके बाद उसने आगे की लड़ाई के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की शरण ली। शेष - पेज ११
विभाग के उपनिदेशक लीला पडियार ने महिला को न्याय का पूरा भरोसा दिलाया। पडियार ने महिला की देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी विभाग की प्रचेता राधा डामोर को दी। विभाग के अधिकारियों ने 6 जून 2013 को महिला आयोग की अध्यक्ष लाडकुमारी जैन के सामने अपना पूरा पक्ष रखा। जिसके बाद उसे न्याय की आस जगी। आयोग की अध्यक्ष ने कलेक्टर और एसपी को महिला की सुरक्षा और कानूनी अधिकार के लिए उसे मदद देने की बात कही। सात साल की लंबी लड़ाई के बाद गुरुवार को बैक ऑफ बड़ौदा की शाखा प्रबंधक ने उसे चाबियां दी। लॉकर खोला गया तो उसमें तकरीबन आठ लाख रुपए की नकदी और आभूषण निकले।
समाज और कानून से लंबा संघर्ष करने के बाद हुई हौसले की जीत