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नदी किनारे अवैध खनन से खीरा, काकड़ी और टमाटर की खेती प्रभावित

8 वर्ष पहले
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अखिलेश पंड्या - सागवाड़ा
क्षेत्र में नदियों के किनारों पर हो रहे अवैध खनन ने सैकड़ों लोगों को बेरोजगार कर दिया है। नदियों के किनारों पर होने वाली ककड़ी खरबूजा या खीरा, वालण काकड़ी और टमाटर की खेती न के बराबर हो रही है।
स्थानीय स्तर पर पैदावार घटने से अब ये फल और सब्जियां बाहर से आने लगी हैं। वहीं दूसरी तरफ इस खेती से जुड़े लोग अब रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं। कुछ लोगों को अब भी खनन क्षेत्र को समतल कर खेती करने की आस है। हालांकि खनन क्षेत्र के किनारों को समतल करने के बाद भी यह खेती हो पाए यह जरूरी नहीं है क्योंकि वहां से रेत का खनन हो चुका है।
इतने परिवार प्रभावित : क्षेत्र की नदियों के किनारों पर खेती करके पेट पालने वाले कीर जाति के क्षेत्र में करीब 500 परिवार हैं। परिवार नदी के पेटे में जनवरी से अप्रैल तक खेती करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं लेकिन इस साल बेहताश अवैध खनन की वजह से जनवरी का माह गुजरने आया पर खेती शुरू नहीं हो पाई है।
इन जगहों पर होती है खेती : क्षेत्र के जोहरा, पटली, कुमजी का पाड़ला, पालोदा के पास कोटड़ा, भीलूड़ी, आसपुर में रामा के अलावा उदयपुर जिले के जेताणा गांव कीर जाति बाहुल्य हैं। मोरन नदी, सोम कमला आंबा व माहीसागर नदियों के किनारों पर ही खेती करते हैं।




यह कहते है अधिकारी

: कृषि अधिकारी एसआर वर्मा ने बताया कि पहले लोग आवश्यकतानुसार हाथ से बजरी निकालते थे] लेकिन अब जेसीबी और मशीनों से बजरी निकाली जा रही है जिससे क्षेत्र में इन सीजनल फलों व सब्जियों की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। ककड़ी खरबूजा आदि की पैदावार का करीब 6 0 प्रतिशत एरिया घट गया है। जो बहुत चिंता का विषय है।
: खान विभाग के सहायक इंजीनियर धनेश्वर रोत ने बताया कि फिलहाल खनन पर रोक लगी हुई है। विभाग द्वारा इसके कड़ाई से पालन के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। रोक हटने के बाद खनन क्षेत्र के आवंटन के समय भी कृषि का नुकसान नहीं हो इस बात का ध्यान रखा जाएगा।

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