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11 साल की मूक-बधिर ने बच्चे को जन्मा

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - बांसवाड़ा
शहर के राजकीय मूक बधिर स्कूल लोधा में कक्षा ५वीं में पढऩे वाली 11 वर्षीय मूक बधिर बालिका ने एक शिशु को जन्म दिया है। गढी कस्बे की रहने वाली इस बालिका को 25 जनवरी की रात को मूक बधिर स्कूल में ही प्रसव पीड़ा हुई। जिस पर स्कूल प्रशासन ने 108 एंबुलेंस को बुलवाया, लेकिन वाहन मेंं हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही बालिका का प्रसव हो गया। पीडि़ता सोमवार तक अस्पताल में भर्ती रही, जबकि उसके शिशु की अस्पताल प्रशासन की ओर से देखरेख की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने शिशु की आयु करीब साढ़े ७ महीने होना बताया है। हालांकि अभी इस बारे में जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। यह भी आशंका है कि इस बालिका के साथ मई या जून के महीने में ज्यादती की गई थी।
स्कूल प्रशासन की ओर से बालिका को राजकीय महात्मा गांधी अस्पताल के गायनिक वार्ड में भर्ती कराया, वहीं इस मामले की जानकारी शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन को दी गई। मामले को लेकर महिला थाने में स्कूल इंचार्ज रंजना यादव ने एफआईआर दर्ज कराई है। इसके पहले एसपी अनिल कुमार टांक के निर्देश पर डीएसपी गजेंद्रसिंह जोधा ने हॉस्पिटल पहुंच कर बालिका के बयान दर्ज किए।
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उसे हावभाव के जरिए और कुछ नाम लिखकर देने के आधार पर पुलिस और शिक्षा विभाग की टीम ने जानकारी जुटाने की कोशिश की है। इस दौरान करीब पौने घंटे तक स्कूल की शिक्षिकाओं की मौजूदगी में बालिका से पूछताछ की गई। स्कूल रिकॉर्ड के मुताबिक बालिका की जन्म 28 जुलाई 2003 है और इस आधार पर बालिका की आयु 11 वर्ष के आसपास है। पीडि़ता इस मूक बधिर स्कूल में २००९ से पढ़ रही थी। इस पूरे प्रकरण को लेकर पुलिस ने धारा 376 और पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। रात को पीडि़ता और उसके शिशु को उदयपुर के लिए रैफर कर दिया गया।



((इधर, परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर लगाए आरोप पेज - २ पर))

2009 में प्रवेश लिया था बालिका ने

मूक बधिर स्कूल में बालिका ने 15 जुलाई 2009 में नियमित प्रवेश लिया था। वह नियमित रूप से बालिका स्कूल में पढ़ाई कर रहीं थी। हालांकि पढ़ाई के दौरान कुछ दिन स्कूल में तो कुछ दिन घर पर रहती थी। वहीं 24 अप्रैल 2013 को स्कूल में परीक्षा खत्म होने के बाद बालिका घर चली गई और 20 जुलाई 2013 को स्कूल में आई है। इसके पहले बालिका अपने ही घर पर रहीं है। इस बात की पुष्टि बालिका के पिता ने भी की है। स्कूल इंचार्ज रंजना यादव ने बताया कि 8 अगस्त 2013 को बालिका अपने भाई के साथ घर के लिए रवाना हुई, जो दुबारा वापस 3 सितंबर 2013 को स्कूल में आई। फिर से 14 सितंबर से लेकर 3 दिसंबर 2013 तक बालिका अपने परिजनों के साथ घर पर रहीं और स्कूल में अनुपस्थित रही। स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार 4 दिसंबर को पिता उसे स्कूल में रख गए। इसके बाद 21 दिसंबर से लेकर 23 जनवरी 2014 तक बालिका नहीं आई। इस दौरान बालिका को उसके परिजन अपने घर ले गए थे।



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शिशु की तबीयत बिगड़ी, मां के साथ उदयपुर भेजा

पीएमओ बिसारिया ने बताया कि शिशु का वजन केवल 1200 ग्राम है, जबकि वजन 1800 ग्राम तक होना चाहिए। शिशु में खून की कमी है, जिस पर अस्पताल प्रशासन ने बालिका के साथ माता-पिता, एक नर्स और पुलिस गार्ड को उदयपुर भेजा है।

महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती पीडि़ता से एक्सप्रेशन ((हाव भाव)) और लिखकर जानने की कोशिश में जुटे डीएसपी गजेंद्रसिंह जोधा और स्कूल का स्टाफकर्मी।