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‘संस्कृति बचाने के लिए विशेष प्रयास जरूरी’

7 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा। सोमवार दोपहर को गाजे बाजों व देशभक्ति गीतों की धुनों पर ध्वज लहराते जैन धर्मावलंबी। ये नजारा था शहर में आर्यिका पूर्णमति माताजी के सानिध्य में 26 जनवरी को निकाली गई शोभायात्रा का। माताजी के स्वागत के लिए जगह-जगह स्वागतद्वार लगाए गए और इस दौरान जैन धर्मावलंबी आचार्य विद्यासागरजी महाराज व आर्यिका पूर्णमति माताजी की जयजयकार करते रहे। बाद में शोभायात्रा गांधी मूर्ति सर्कल स्थित धर्मसभा स्थल पहुंची।
जहां आर्यिका पूर्णमति माताजी ने कहा कि 65 वर्षों पूर्व संविधान लागू हुआ था और आज देश और भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता हैं। उन्होंने टीवी के प्रति बढ़ते रूझान को आने वाली पीढ़ी के लिए घातक बताते हुए कहा कि अधिक ध्यान टीवी की ओर देने से परिवार के लोगों का आपस में संवाद, मेलजोल, प्रेम व्यवहार काफी कम होता जा रहा है। यही परिवार के बिखराव के कारण हैं। माताजी ने कहा कि हिन्दुस्तान में पहले तीन भाषाओं प्राकृत, संस्कृत व हिन्दी का प्रयोग होता था। प्राकृत से प्रकृति,संस्कृत से संस्कृति व हिन्दी से कृति उत्पन्न होती थी। आज के प्रतिस्पद्र्धा के युग में अंग्रेजी भाषा का महत्व बढ़ा है, लेकिन हमें प्राकृत, संस्कृत व हिन्दी भाषा को नहीं भुलाना चाहिए। धर्मसभा में जिला कलेक्टर कुंजबिहारी गुप्ता मौजूद थे, जिन्होंने जैन समाज को केंद्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने पर बधाई दी व संस्कृति बचाने के लिए समन्वित प्रयास पर बल दिया। इस अवसर पर आचार्य विद्यासागरजी महाराज के चित्र का अनावरण रमेश पंचोरी ने किया व विपिन जैन ने माताजी को शास्त्र भेंट किए। आरती उतारने के लाभार्थी लक्ष्मीलाल नायक परिजन रहे। संचालन संरक्षक महावीर बोहरा ने किया। पुलक जन चेतना मंच व महिला जागृति मंच द्वारा आयोजित धर्मसभा के अंत में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हेमंत सेठ ने आभार जताया।



पूर्णमति माताजी के जयकारों के साथ शहर में निकली शोभायात्रा