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स्कूल कैंपस में हुई थी ११ वर्षीया की छात्रा की डिलीवरी

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बांसवाड़ा
सरकारी मूक बधिर आवासीय स्कूल में ५वीं कक्षा में पढऩे वाली बालिका की 108 एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही स्कूल परिसर में डिलीवरी हो चुकी थी। डिलीवरी होने से पहले से बालिका को प्रसव पीड़ा हुई थी। शनिवार रात्रि को भोजन करने के बाद बालिका को प्रसव दर्द उठा तो मौजूद चौकीदार ने सामान्य दर्द समझकर दर्द की गोली दे दी थी।
यह चौकाने वाला खुलासा स्कूल के चौकीदार कांतिलाल ने बाल कल्याण समिति की टीम को दिए बयान में किया। बयानों में कांतिलाल ने बताया कि डिलीवरी भी उसी ने ही कराई है और शिशु को अपने हाथों से लिया। बालिका को डिलीवरी से पहले ब्लडिंग चालू हो गई थी और पैरों तक ब्लड आ चुका था, तब उसे समझ में आ गया कि आखिर समस्या क्या है। इसके पहले कांतिलाल ने स्कूल इंचार्ज रंजना यादव को सूचना दे दी थी। दूसरी ओर, डिलीवरी होने के बाद 108 एंबुलेंस पहुंची और बालिका को इसके माध्यम से सरकारी एमजी हॉस्पिटल पहुंचाया गया। इस प्रकरण में पहले यहीं बताया जा रहा था कि बालिका की डिलीवरी 108 एंबुलेंस में हुई थी। कांतिलाल के मुताबिक सारी परिस्थितियां समझ में आने के बाद दूसरे बच्चे डबल मंजिला स्कूल की ऊपरी विंग में थे, उन्हें नीचे उतारा गया। ऊपर के ही एक कमरे में बालिका को पहुंचाया गया। इसके बाद बालिका को प्रसव हुआ। इस बीच स्कूल की इंचार्ज रंजना यादव भी पहुंच चुकी थी। दूसरी ओर, इस घटना के बाद बालिका को एमजी हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया। इस दौरान भी कांतिलाल पूरी तरह से साथ में रहा। उसके अनुसार उसने इन परिस्थितियों में भी हौंसला नहीं खोया, यदि ऐसा नहीं करता तो कोई भी अनहोनी हो सकती थी।
शेष - पेज ८



((पीडि़ता ने संकेतों में बताया

दुष्कर्मी का नाम, पेज-२))

वार्डन के नहीं होने से उठे सवाल

मूक बधिर आवासीय स्कूल में वार्डन नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल समय के बाद सभी मूक बधिर बच्चे चौकीदार और चपरासी के भरोसे रहते हैं। हैरत की बात तो यह है कि मूक बधिर स्कूल खोले कई वर्ष बीत गए, लेकिन अब तक नियमित रूप से जहां स्टाफ की कमी है, वहीं शिक्षा विभाग वार्डन तक की व्यवस्था नहीं कर पाया है। यदि नियमित वार्डन होती तो निश्चित रूप से इस तरह की परिस्थिति नहीं बनती और संभव था कि चौकीदार के बजाय वार्डन के माध्यम से ही बालिका की डिलीवरी होती।

भास्कर पड़ताल - रिहायशी मूक-बधिर स्कूल में प्रसव के समय चौकीदार अकेला ही था, बाद में पहुंचा स्टाफ