गिरि बापू ने बताई शिव की महिमा
भास्कर न्यूज - परतापुर
गढ़ी राव हिम्मत सिंह खेल मैदान पर संतश्री गिरि बापू के सानिध्य में आयोजित शिवकथा के तीसरे दिन बापू ने भगवान शंकर के स्वरूप की व्याख्या की। बापू ने कहा कि मानव सुख के लिए दौड़ता है लेकिन अंत में मिलती है सिर्फ मृत्यु, सुख तो भीतर है।
शंकर ने कभी भी वरदान नहीं मांगा उन्होंने तो वरदान दिया है। जिस प्रकार इस देश की परंपरा रही है पशु पूजा। हमारे देश में वृद्ध बैल को पूजा जाता है आज के इस दौर में वृद्ध बाप को भी नहीं पालते हैं। जब कि वृद्ध बैल ने मानव हित में अन्न के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। बापू ने पॉलीथिन के उपयोग पर गहरा दुख जताया। बापू ने कथा में प्रदोष व्रत और पूजा, महाशिवरात्रि का महत्व बताया तथा बली शब्द की गलत व्याख्या को समझाया।
प्रवचन : मानव सुख के लिए दौड़ता है लेकिन अंत में मिलती है सिर्फ मृत्यु