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गलियों से लेकर सड़कों पर नेटवर्किंग कंपनियों का कब्जा

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बांसवाड़ा
शहर को नगर परिषद, सार्वजनिक निर्माण विभाग और नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ओर से निजी कंपनियों के हवाले कर दिया है। निजी कंपनियों के हवाले करने के लिए सभी ने अपनी अपनी सीमा के हिसाब से रुपए भी लिए हैं। यह राशि लाखों में है, जो कि सभी विभागों के विभागीय खातों में पहुंच चुकी है। सभी विभाग की ओर से जिन शर्त के आधार पर काम करने की इजाजत दी गई थी, उनकी पालना नहीं की जा रही है। इसका एक नजारा हाल में हुई बारिश के दौरान देखने को मिला है। अब यदि बारिश होगी तो शहर की क्या हालात होगी और इसका जिम्मेदार कौन होगा, इसके बारे में किसी ने भी नहीं सोचा है।
हाउसिंग बोर्ड, मोहन कॉलोनी, नाथेलाव, श्रीराम कॉलोनी हो या फिर कॉलेज रोड, कस्टम चौराहा। नेशनल हाईवे हो या फिर स्टेट हाईवे, छोटी क्या नहीं हों। सभी का एक जैसा हाल है। शहर में इन दिनों नेटवर्किंग कंपनियों की ओर से अपनी केबल का जाल बिछाया जा रहा है। अलग-अलग कंपनियों की ओर से कुल 20 किलोमीटर नाली खोदी जानी है। इनमें कई निजी कंपनियां शामिल हैं। तीन कंपनियों की ओर से दावा किया जा रहा है कि केबल डालने के लिए उनकी ओर से पर्याप्त राशि जमा कर काम करने की अनुमति ली है।
यह है मामला : पहले नेटवर्किंग कंपनियां साझा केबल का उपयोग करती थीं। इस कारण शहर में एक ही केबल से काम चल रहा था। अब यह करार समाप्त हो गया है। इस कारण कंपनियां स्वयं की केबल डाल रहीं हैं। इस कारण शहर की हर गली मोहल्ले में नाली खोदी जा रही है।
यह करना है काम : सभी विभाग ने रुपए लेकर तीनों कंपनियों को काम करने की अनुमति दी है। इसके तहत एक मोबाइल कंपनी ने नगर परिषद को 31 लाख सात हजार 500 रुपए दिए। वहीं सार्वजनिक निर्माण विभाग को 11 लाख 43 हजार 843 दिए गए हैं। दूसरी मोबाइल कंपनी ने नेशनल हाईवे को नौ लाख 40 हजार और सार्वजनिक निर्माण विभाग को दो लाख पांच हजार रुपए दिए हैं।
क्या कहते हैं प्रतिनिधि
सभी कंपनियों की ओर से ठेकेदार के जरिए से काम कराया गया है। एक निजी कंपनी के ठेकेदार पवन कुमार ने बताया कि हमने रुपए जमा कर काम शुरू किया है। अभी तक काम चल ही रहा है। विभागों की ओर से दी गई शर्त के अनुसार काम कराया जा रहा है। वहीं दूसरी निजी कंपनी के ठेकेदार ने बताया कि विभाग की ओर से मांगी गई राशि को जमा कर काम शुरू किया है। उसी के अनुसार नालियों को भरा जा रहा है।




नगर परिषद ने इन शर्त पर दी इजाजत

> कटिंग के बाद मलवा हटवा कर सही तरीके से काम किया जाए।

> आवागमन किसी भी तरह से बाधित नहीं हो।

> कटिंग के बाद सही तरीके से इसे पेचवर्क किया जाए।

> नाली का भराव निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो।

पीडब्ल्यूडी की ये शर्तें थी

> नाली खोदने से भरने तक का पूरा काम 15 दिन में खत्म करना होगा।

> खोदी गई नाली का भरने के लिए मिट्टी और पत्थरों का उपयोग करना होगा।

कोई नहीं देख रहा कि क्या हो रहा है शहर में

पक्का निर्माण हम कराएंगे

॥हमने रुपए जमा कर के ही राशि नाली खोदने की अनुमति दी है। नाली खोदने के बाद उसके भरने का जिम्मा खोदने वाले का है। सही तरीके से भरनी होगी। इसके लिए पत्थर डालें या बाहर से मिट्टी लाएं, संबंधित को ही भरनी है। सड़क के साइड में पक्का निर्माण कराने का जिम्मा हमारा है। इसके लिए हम बहुत जल्द टेंडर कर रहे हैं। एक कंपनी की ओर से सही तरीके से काम नहीं किया जा रहा था, उनको बुला कर हिदायत दी है कि सही तरीके से काम करो अन्यथा अनुमति निरस्त कर दी जाएगी।ञ्जञ्ज

दिलीप गुप्ता, आयुक्त, नगर परिषद

केस नंबर : २

दाहोद रोड पर एक ओर खुदाई की जा रही है। एक कंपनी की खुदाई की जा रही है, दूसरी कंपनी की ओर से हाल में खुदाई कर गड्ढे उसी मिट्टी से भर दिए गए हैं। वहीं, सड़क के दूसरी ओर एक कंपनी ने केबल डालने के बाद नाली को भर दिया है। तीन तीन कंपनियों ने खुदाई की, काम सही नहीं हुआ, फिर भी कार्रवाई नहीं।



उदयपुर रोड से लिंक रोड होते हुए कॉलेज रोड पर खुदाई की जा रही है। दिनभर मजदूर नाली बनाने में लगे हुए हैं। यहां से जिले के कई आला अधिकारियों के साथ ही जनप्रतिनिधि निकलते हैं। एक ओर नाली खोदी जा रही है तो दूसरी ओर से इसे भरा भी जा रहा है। किसी ने भी यह कोशिश नहीं की इसकी जांच की करा ली जाए कि आखिर क्या हो रहा है।



केस नंबर : ३

शहर की खांदू कॉलोनी का क्षेत्र। यहां कई गलियों में कीचड़ पसरा हुआ है। यहां आने जाने वालों के अलावा स्थानीय लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। कारण, नेटवर्किंग कंपनियों की ओर गलियां में खुदाई कराने के बाद सही तरीके से इनका भरा नहीं गया। अभी तक किसी अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

केस नंबर : १