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सभी पूजाओं में सबसे श्रेष्ठ शिव की आराधना

7 वर्ष पहले
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परतापुर - गढ़ी खेल मैदान पर आयोजित गिरि बापू के सानिध्य में आयोजित हो रही शिव कथा के चौथे दिन शिवलिंग की महिमा बताई। शिवकथा में बापू ने कहा कि भगवान शंकर की दो तरह से पूजा की जाती है। एक तो मूर्ति की और दूसरी शिवलिंग की। क्योंकि सभी देवता जीवंत आकार है जबकि भगवान शंकर निराकार है। भगवान शिव की पूजा सभी पूजाओं में श्रेष्ठ है।
ऋषि मुनि बताते है कि शिवलिंग आकाश का प्रतीक है जिसमें पूरा ब्रह्मांड आता है। इसमें तारामंडल, सभी ग्रह आदि आते है वही माता पृथ्वी की पीठ पूजा होती है। सबसे पहले शिवलिंग की पूजा ब्रह्मा व विष्णु ने की थी जिस दिन को महाशिवरात्रि थी। बापू ने कथा में शिव, पार्वती, कार्तिक व गणेश की महिमा बताई गई। बापू ने शिव के गले में नाग देवता के बारे में बताया कि मानव जीवन पर हमेशा काल मंडराता है।



कथा के प्रारंभ में गिरि बापू द्वारा पुस्तक मेले में गायत्री माता की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पहार चढ़ाए। वही वेदमाता भगवती देवी तथा पंडित श्रीराम शर्मा की तस्वीर पर भी पुष्प अर्पित किए। पुस्तक मेले में स्थित शास्त्रों और साहित्य का अवलोकन किया। इस दौरान बापू को गायत्री परिवार की ओर से साहित्य को भेंट किया गया। कथा में महाआरती के बाद महा प्रसाद बांटा गया। कथा में कमल भाई खडग़दा का बहुमान किया गया। कथा में मुख्य यजमान, प्रभज्योत सिंह, त्रिमेस के वागड़ चौखला अध्यक्ष भूपेंद्र पंड्या, जसवीर भाई, दिनेश मेहता आदि सहयोग कर रहे है।

बापू ने गायत्री माता की पूजा की

गढ़ी में शिवकथा के दौरान बताई पूजा करने की विधि