बुराई का उत्तर भलाई से दें : गिरि बापू
भास्कर न्यूज - परतापुर
शिव की प्राण प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जाति है। क्यों की वह सब के प्राण है। स्थापित लिंग की प्रतिष्ठा तथा अन्य देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाति है। गढ़ी खेल मैदान पर आयोजित शिवकथा में बापू ने शिव की उपासना किस प्रकार करने तथा अपने जीवन में जो मिला है उसको संजोने का सार बताया। शिव के गर्भगृह में पवित्र व्यक्ति पूजा कर सकता है चाहे वह पुरुष हो या महिला लेकिन स्पर्श कर प्रणाम नहीं करना चाहिए। इसका कारण बताते हुए बापू ने कहा कि शिव के दरबार में पवित्रता प्रधान होती है। कोई भी व्यक्ति संासारिक अपवित्र वस्त्रों में शिव तो क्या किसी भी देव की पूजा नहीं कर सकता। स्पर्श कर प्रणाम वही कर सकते हंै। जो कोरे वस्त्र या भीगे वस्त्र पहने हों।
बापु ने कथा में ब्रह्मा और नारद के प्रसंग सुनाते हुए त्रिकाल पूजा के महत्व बताए। बापू ने कथा में बताया कि ब्रह्मा ने नारद से कहा कि इस पृथ्वी पर ज्योर्तिलिंग पूरा जगत पूरा ब्रह्माड लिंग स्वरूप है। पृथ्वी पर असंख्य शिवालय हैं। जिस गांव में शिवजी का शिवालय नहीं हो उस गांव का पानी तक नहीं पीना चाहिए, जिनके घर में शिव पूजा नहीं हो उनके घर का पानी नहीं पीना चाहिए और जिसके मुख में शिव का नाम नहीं हो उसका मुंह भी देखना नहीं चाहिए।
बापू ने कथा में केवड़ा ((फूल)) और ब्रह्मा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि केवडे को ब्रह्मा ने अग्नि स्तंभ को अंत लेने के लिए झूठ बुलवाया। केवड़ा लोभ में आ गया तथा विष्णु के सामने ब्रह्मा द्वारा अग्नी का अंत लेने का झूठ बोला जो विष्णु ने झूठ को पकड़ लिया बात भगवान शंकर तक गई तथा शंकर ने ब्रह्मा को श्राप दे दिया कि तेरी पूजा कोई नही करेगा तब विष्णु ने ब्रह्मा के लिए भगवान शंकर से माफी मांगी। वहीं, दूसरी ओर प्रख्यात भजन गायक अश्विन जोशी की भजन संध्या आज शाम को होगी। कथा में उपखंड अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका, तहसीलदार गौतमलाल कुम्हार, पूर्व एडीएम तुलसीराम जोशी, दीनबंधु भट्ट आदि ने भी धर्मलाभ लिया तथा मुख्य यजमान प्रभज्योत सिंह सोनी, वागड़ चौख अध्यक्ष भूपेंद्र पंड्या, जसवीर भाई, दिनेश मेहता आदि मौजूद थे।
वैदिक क्रियाओं में यजमानों ने दी आहुतियां : कथा के पांडाल की यज्ञ शाला में पंडित नटवर शक्ला एवं चन्द्रशेखर द्वारा आवाहित देवता पूजन, ब्राह्मण पूजन, द्वादश लिंग पूजन, शिव पार्थिश्वर पूजन सहित रूद्रस्वाकार की यज्ञ में आहुतियां दी गई।
पर असंख्य शिवालय हैं। जिस गांव में शिवजी का शिवालय नहीं हो उस गांव का पानी तक नहीं पीना चाहिए, जिनके घर में शिव पूजा नहीं हो उनके घर का पानी नहीं पीना चाहिए और जिसके मुख में शिव का नाम नहीं हो उसका मुंह भी देखना नहीं चाहिए।
बापू ने कथा में केवड़ा ((फूल)) और ब्रह्मा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि केवडे को ब्रह्मा ने अग्नि स्तंभ को अंत लेने के लिए झूठ बुलवाया। केवड़ा लोभ में आ गया तथा विष्णु के सामने ब्रह्मा द्वारा अग्नी का अंत लेने का झूठ बोला जो विष्णु ने झूठ को पकड़ लिया बात भगवान शंकर तक गई तथा शंकर ने ब्रह्मा को श्राप दे दिया कि तेरी पूजा कोई नही करेगा तब विष्णु ने ब्रह्मा के लिए भगवान शंकर से माफी मांगी। वहीं, दूसरी ओर प्रख्यात भजन गायक अश्विन जोशी की भजन संध्या आज शाम को होगी। कथा में उपखंड अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका, तहसीलदार गौतमलाल कुम्हार, पूर्व एडीएम तुलसीराम जोशी, दीनबंधु भट्ट आदि ने भी धर्मलाभ लिया तथा मुख्य यजमान प्रभज्योत सिंह सोनी, वागड़ चौख अध्यक्ष भूपेंद्र पंड्या, जसवीर भाई, दिनेश मेहता आदि मौजूद थे।
वैदिक क्रियाओं में यजमानों ने दी आहुतियां : कथा के पांडाल की यज्ञ शाला में पंडित नटवर शक्ला एवं चन्द्रशेखर द्वारा आवाहित देवता पूजन, ब्राह्मण पूजन, द्वादश लिंग पूजन, शिव पार्थिश्वर पूजन सहित रूद्रस्वाकार की यज्ञ में आहुतियां दी गई।