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५ हजार 963 किसानों को एक एक रुपए से कम मिला है क्लेम
भास्कर न्यूज - बांसवाड़ा
मौसम आधारित फसल बीमा योजना में एक के बाद एक खामिया नजर आ रही हैं। एक रुपए से कम क्लेम मिलने के वाले किसानों की संख्या एक दो नहीं, बल्कि ५ हजार 963 है। एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया ने खरीफ सीजन में बीमा किया है।
जिले में 86 हजार 103 किसानों की ओर से चार करोड़ 46 लाख 81 हजार रुपए का प्रीमियम अदा कर 151 करोड़ 10 लाख 39 हजार का बीमा कराया गया था। इस राशि में जिले की कुल एक लाख 69 हजार 819.67 हैक्टेयर फसल का बीमा हुआ था। खरीफ के सीजन में अत्यधिक बारिश होने के कारण जिले के किसानों को 250 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कई प्रकार से राहत दी थी, वहीं बीमा कंपनियों ने क्लेम देने में भी गड़बड़ कर दी है। बीमा कंपनी ने कुल 83 अवार्ड के जरिए दो करोड़ 34 लाख 15 हजार 246 रुपए और 88 पैसे कर क्लेम पास किया है।
४ हजार किसानों को 88-88 पैसे बीमा क्लेम
गढ़ी तहसील के मेतवाला वैदर स्टेशन से जुड़े को पहले लोट में मक्का में हुए खराबे में ३ हजार ८62 किसानों की तीन हजार 421 हैक्टेयर के लिए प्रति हैक्टेयर रुपए के हिसाब से तीन हजार 421 रुपए क्लेम दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि प्रति किसान 88 पैसे मिलेंगे। गढ़ी के ही मेतवाला वैदर स्टेशन के दो हजार 101 किसानों की 878 हैक्टेयर भूमि के लिए एक रुपए प्रति हैक्टेयर के अनुसार 878 रुपए दिए गए हैं।
65 हजार को 100 रुपए से कम क्लेम : बीमा कंपनी ने जो क्लेम दिया गया है उसमें 65 हजार 825 किसान परिवार ऐसे हैं, जिनको 100 रुपए या इससे कम बीमा क्लेम दिया गया है। शेष को 100 से अधिक 707 से कम दिया गया है। सर्वाधिक क्लेम सज्जनगढ़ क्षेत्र के डूगरा छोटा वैदर स्टेशन से जुड़े 688 किसानों को दिया गया है। इन किसानों की 212 हैक्टेयर के लिए एक लाख 56 हजार 247 रुपए का बीमा क्लेम दिया है।
मनमानी शर्त के कारण ऐसा हुआ
बीमा कंपनी और सरकार के बीच एमओयू होने के बाद बीमा कराया जाता है। एमओयू में इस प्रकार की शर्त जोड़ी जाती हैं जिस कारण कम क्लेम बनता है। दूसरा यह है कि सरकार से ऋण लेने वाले किसानों को बीमा कराना मजबूरी होता है। सरकार की ओर से ध्यान नहीं देने के कारण बीमा कंपनियां इसका लाभ लेती हैं।
जो आया है दिया जाएगा
॥यह बात सही है कि बीमा क्लेम बहुत कम आया है, जो भी क्लेम आया है वह किसानों को दिया जाएगा। हमारा काम है सरकार के आदेशों की पालना करना। बीमा क्लेम क्यों कम आया या किसका आया किसका नहीं। अब यह जानकारी तो बीमा कंपनी ही दे पाएगी।ञ्जञ्ज
शंकरलाल डामोर, एमडी, केंद्रीय सहकारी बैंक
हक की लड़ाई लड़ रहे हैं
केंद्रीय सहकारी बैंक के डायरेक्टर राजेश कलाल, योगेश जोशी और राजेंद्र पंचाल ने बताया कि बीमा कंपनियां जिले के किसानों को धोखा दे रहीं हैं। हम लंबे समय से इस बात की लड़ाई लड़ रहे हैं। कृषि विभाग बीमा क्लेम के संबंध में सुनवाई नहीं कर रहा है। समय रहते सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो किसानों के भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। जिले से खरीफ में चार करोड़ रुपए प्रीमियम गया और दो करोड़ रुपए बीमा क्लेम मिला। किसानों को 25 पैसे 50 पैसे क्लेम दिया जा रहा है, इससे भद्दा मजाक किसानों के साथ नहीं किया जा सकता।
भास्कर पड़ताल - मौसम आधारित फसल बीमा का मामला, प्रीमियम में जितनी राशि दी क्लेम उसका भी आधा मिला, किसानों के साथ कुठाराघात
३० जनवरी को प्रकाशित खबर