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दो माह हो गए, फिर से परिषद नहीं भेज पाई पानी के बिल

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - नागौर
पिछले साल अप्रैल में नगर परिषद को शहर में जलापूर्ति का जिम्मा सौंपा गया था, तब से और परेशानियां तो हो ही रही हैं, लोगों को समय पर पानी के बिल तक नहीं मिल रहे। पानी वितरण की जिम्मेदारी मिलने के चार माह बाद परिषद ने लोगों के घर बिल भेजे, वे भी बिना छूट के। उपभोक्ताओं को लगा कि उन पर पेनल्टी लगा दी गई लेकिन वह सरकारी छूट थी। समय निकलने पर यह रद्द कर दी गई। परिषद की गलती का खामियाजा उपभोक्ताओं पर डाल दिया गया। इस बार भी परिषद ने कई मोहल्लों में अब तक बिल नहीं भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिल नहीं मिलने पर पीएचईडी ऑफिस से बिल प्राप्त करना उपभोक्ताओं का जिम्मा है।
नगर परिषद को जलापूर्ति का जिम्मा मिले एक साल होने वाला है, लेकिन अधिकारी व कार्मिक अब तक व्यवस्था को नहीं संभाल पाए हैं। शहर में जलापूर्ति के लिए 11 जोन हैं। बिल वितरण करने के लिए इन जोन को 5 व 6 के दो क्षेत्रों में बांटा गया है। एक महीने पांच जोन तो दूसरे महीने छह जोन में बिल का वितरण किया जाता है। लेकिन कई जगह अब तक बिल नहीं दिए गए हैं। परिषद इन्हें वितरित करते समय छूट रद्द करके बिल थमा देता है। बिलों पर एक लाइन भी प्रिंट की गई है जिसमें लिखा है कि प्रत्येक दो महीने बाद उपभोक्ता को बिल नहीं मिले तो 14 तारीख तक ऑफिस आकर बिल प्राप्त करने की जिम्मेवारी उपभोक्ता की होगी। ऐसा कर परिषद ने तो अपनी जिम्मेवारी पूरी कर ली, लेकिन इससे उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि बिल के लिए परिषद में जाएं या पीएचईडी में। परिषद के तकनीकी कर्मचारी पीएचईडी ऑफिस में ही बैठते हैं। इस बार भी बिल वितरित करने में परिषद समय लगा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि हमने तो बिल में साफ लिखा है कि महीने की 14 तारीख तक बिल ऑफिस से प्राप्त कर लें। पिछला बिल आए दो माह से ज्यादा हो चुका है लेकिन लोगों को अब तक बिल नहीं मिले हैं। ऐसे में यह परेशानी हो रही है कि कहीं इस बार भी बिल की राशि सैकड़ों में न आ जाए। इसके बाद उपभोक्ताओं को परिषद व पीएचईडी के चक्कर लगाने पड़ते हैं, क्योंकि परिषद के तकनीकी कार्मिक पीएचईडी ऑफिस में ही बैठते हैं।
पैनल्टी नहीं, सरकारी छूट रद्द होती है
समय निकलने के बाद जो अतिरिक्त राशि जमा करवानी पड़ती है वह असल में कोई पैनल्टी नहीं होती। वह तो राज्य सरकार की 20 प्रतिशत छूट है जो समय निकलने पर रद्द कर दी जाती है। जब तक पानी के मीटर नहीं लगेंगे, प्रत्येक उपभोक्ता को दो माह का अधिकतम बिल 52 रुपए ही जमा करवाना पड़ रहा है। निश्चित समय निकलने के बाद इसमें जो 8 रुपए की सरकारी छूट दी जाती है वह रद्द कर दी जाती है। ऐसे में 60 रुपए जमा करवाने पड़ते हैं। पहली बार परिषद ने 300 रुपए तक के बिल थमा दिए थे। बाद में गलती मानते हुए कई बिलों में राशि माफ की गई। अधिकारियों का कहना है कि उसमें भी पैनल्टी जैसी कोई बात नहीं थी। असल में पैनल्टी लगाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। आने वाले समय में जरूर मूल राशि का 12 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज लगाने की योजना का प्रारूप आया है लेकिन उसे अभी लागू करने की कोई सूचना नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि अभी पेयजल की लागत १५ किलोलीटर पानी के लिए १.२५ पैसा प्रति लीटर है। उससे अधिक ४० किलोलीटर तक के लिए यह लागत २.४० पैसे है। अभी जो बिल दिया जा रहा है उसमें अनुमान से ही दो महीनों की ६० रुपए राशि जोड़ी जाती है। पानी के मीटर लगाने के बाद बिलों में आने वाली परेशानी समाप्त होने की उम्मीद है।