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सुरक्षा को लेकर दोहरे मापदंड, रेलवे ट्रैक के समीप सीवरेज के लिए खुदाई !

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - मकराना
मार्बल नगरी मकराना में रेलवे ने एक ओर तो रेलवे ट्रैक से पैंतालीस मीटर दूर की मार्बल खानों को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बंद करवा रखा है वहीं दूसरी ओर सामरिक महत्व के मकराना-मेड़ता रेल मार्ग से महज पांच से दस फीट की दूरी पर ही पटरियों के समानांतर लगभग दो सौ मीटर की लंबाई में तीस से चालीस फीट गहरी खुदाई कर दी गई है। यह खुदाई रेलवे भूमि में से होकर सीवरेज लाइन डालने के लिए की जा रही है जिसकी परमिशन रेलवे ने नगर परिषद को लगभग दो करोड़ रुपए लेकर दी है। यह एरिया रेवंत डूंगरी खानों के पास है।
रेल पटरियों के उत्तर में रेलवे पोल संख्या 66 के करीब से होते हुए लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबाई में खुदाई की जानी है। खुदाई एरिया में रेवंत डूंगरी मार्बल रेंज आई हुई है। इन बेशकीमती मार्बल चट्टानों को सीवरेज ठेकेदार भारी भरकम मशीनें, वायर शॉ कट आदि लगाकर बाहर निकलवा रहा है। इनके स्थान पर भीतर सीवरेज के पाइप फिट किए जा रहे हैं। इस रेल मार्ग पर दिन रात सवारी, एक्सप्रेस, सुपर फास्ट ट्रेनों व मालगाडिय़ों का आवागमन रहता है। गाडिय़ों के आवागमन के समय खुदाई क्षेत्र के पास कोई रेलवे कर्मचारी मौजूद नहीं रहता। सुरक्षा इंतजामों की उल्लंघन इस कदर हो रहा है कि सीवरेज के पाइप डालने के दौरान रेलवे महकमा ट्रेनों के लिए नो कॉशन देना और न ही ब्लॉक लेना उचित समझ रहा है। जानकारों का कहना है कि रेलवे ट्रैक के समीप की जा रही खुदाई से रेलवे को ट्रैक व रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी ओर रेलवे ने इन्हीं सुरक्षा कारणों को लेकर खुदाई वाले एरिया के सामने ही रेलवे सीमा के बाहर की कुछ खानों को बंद करवा रखा है।
कहां गायब हो गया लाखों का मार्बल
रेलवे पटरियों के पास चल रहे सीवरेज खुदाई के मार्ग में मार्बल की बड़ी चट्टानें आई हुई हैं जो रेवंत डूंगरी किस्म के नाम से जानी जाती है। खुदाई में इन चट्टानों को काटकर मार्बल निकाल लिया गया है परंतु वह मौके पर मौजूद नहीं है। मार्बल अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया है। उसकी जगह केवल मिट्टी की खुदाई बताई जा रही है।
दिखावे के तौर पर पांच छह मार्बल के ब्लॉक पंचायत समिति मैदान में रखवा दिए गए हैं जबकि खुदाई वाले स्थान पर जाकर देखें तो चट्टानों को काटकर ब्लॉक निकालना साफ दिखाई दे रहा है।
रेल पथ के सहायक अभियंता आरएस वर्मा पिछले लगभग पांच साल से मकराना में ही कार्यरत हैं। जहां सीवरेज के लिए खुदाई हो रही है उस क्षेत्र में गुजरने वाली ट्रेनों की न तो गति धीमी की जा रही है और न ही उन्हें रोककर उधर से सुरक्षित निकाला जा रहा है। इस संबंध में वर्मा से जानकारी चाही तो उनका कहना था कि अभी तक की खुदाई से रेलवे ट्रैक को कोई खतरा पैदा नहीं हो रहा है। खतरे की स्थिति बनेगी तो काम रुकवा देंगे। वैसे हमने वहां आदमी छोड़ रखा है। खुदाई से निकलने वाले बेशकीमती मार्बल के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि वहां मार्बल नहीं मलबा निकल रहा है। मार्बल ब्लॉक्स की फोटोज का हवाला दिया गया तो कहा कि उसको बेचने से रेलवे को आय हो जाएगी।