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- मेड़ता में मिलीं 10वीं शताब्दी की धरोहरें और शिलालेख!
मेड़ता में मिलीं 10वीं शताब्दी की धरोहरें और शिलालेख!
भास्कर न्यूज - मेड़ता सिटी
मीरा शोध संस्थान ने प्रथम चरण में मेड़ता उपखंड में 10वीं शताब्दी तक के कई महत्वपूर्ण शिलालेख और पुरातात्विक धरोहरों की खोज की है जो राजस्थान के इतिहास कई नई कडिय़ों को खोल रहे हैं। इनमें सबसे खास खोज 1062 ईस्वी का एक शिलालेख है। विडंबना यह है कि कई गांवों में पड़ी इन धरोहरों का कोई धणी धोरी नहीं है। यह शोध और सर्वेक्षण मीरा शोध संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष दीपचंद सुथार व उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने मिलकर किया है। सुथार ने बताया कि प्रथम चरण में जिले की मेड़ता, रियां बड़ी व डेगाना क्षेत्र के जसनगर, जलवाणा, चंपाखेड़ी, सिरासना, धौलेराव, चुई, रेण, डाबरियाणी, खेडूली, गंगारड़ा, भंवाल सहित अन्य गांवों से करीब 50 शिलालेख खोजे गए हैं।
राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के इतिहासकार नरेंद्र सिंह ने बताया कि इन गांवों के शोध एवं सर्वेक्षण से बरसों से गुमनाम अनेक पुरा संपदाओं और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी भी मिली है। कई धरोहरें ऐसी भी हैं जो किंवदंतियों व जनश्रुति में तो जीवित हैं लेकिन इतिहास के पन्नों में आज तक दर्ज नहीं हैं। मारवाड़ का यह क्षेत्र प्राचीन शिलालेखों का विपुल भंडार है। प्राचीन बस्तियों के अलावा कई युद्ध भी इस धरा पर हुए हैं। इन युद्धों में हुए शहीदों की स्मृतियां भी पाई गई हैं। उस काल में कई शहीदों के स्मारक बनाए गए थे। इन स्मारकों की प्रामाणिकता साबित करने के लिए पर्यटन, पुरातत्वविदों और इतिहासकारों की सेवाएं ली जाएंगी। इन नई खोजों को इतिहास में स्थान मिल सकेगा।