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खुली अदालत में होगी भुल्लर की याचिका पर सुनवाई
नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के आतंकी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली है। शुक्रवार को इस पर खुली कोर्ट में सुनवाई होगी। उसकी पत्नी नवनीत कौर ने कोर्ट से फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की गुहार लगाई है।
इससे पहले कोर्ट ने 12 अप्रैल 2013 को भुल्लर की याचिका ठुकरा दी थी। कहा था कि दया याचिका पर फैसले में देरी फांसी माफ करने का आधार नहीं हो सकता। लेकिन हाल ही में 21 जनवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने इस फैसले को पलट दिया है।
आठ साल बाद हुआ था दया याचिका पर फैसला
भुल्लर पर सितंबर 1993 में नई दिल्ली में बम ब्लास्ट करने का आरोप है। इसमें नौ लोगों की मौत हुई थी। युवक कांग्रेस के उस समय के अध्यक्ष एमएस बिट्टा समेत 25 लोग घायल हुए थे। भुल्लर को ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2001 में फांसी की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट से भी सजा पर मुहर लगने पर भुल्लर ने 14 जनवरी 2003 को राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी। इस पर आठ साल बाद 14 मई 2011 को फैसला हुआ। उसकी दया याचिका खारिज कर दी गई।
देविंदर पाल सिंह भुल्लर की पत्नी ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की लगाई है गुहार