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पुराने अधिनियम से अवाप्ति अवाप्ति का विरोध

8 वर्ष पहले
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शिवकर लिग्नाइट परियोजना : 7 गांवों की 4,744 बीघा भूमि अवाप्ति के लिए प्रस्तावित

भास्कर न्यूज . बाड़मेर

शिवकर लिग्नाइट परियोजना के लिए भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लग गया है। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को मंजूरी मिलने से 1 जनवरी, 2104 से लागू हो चुका है, जबकि आरएसएमएमएल की ओर से अधिनियम 1984 के तहत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है। इससे भूमि अवाप्ति से प्रभावित हो रहे किसानों के अधिकारों के साथ कुठाराघात हो रहा है। यह बात लीगल मित्र संस्था के सचिव रितेश शर्मा ने मंगलवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में कही।

शर्मा ने कहा कि नए भूमि अधिग्रहण कानून में भूमि धारकों के साथ अन्य प्रभावित लोगों को भी शामिल करना प्रस्तावित है। इसके लिए सामाजिक सर्वेक्षण कराया जाकर ही भूमि को अधिग्रहित किया जा सकता है। भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने धारा 9 में कार्यवाही की है। इससे किसानों के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि नए कानून के अस्तित्व में आने से परियोजना में दिया जाने वाला प्रतिकार नए कानून के अनुसार दिया जाना चाहिए। किसान नेता स्वरूपसिंह आगौर ने बताया कि देश में नए भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद पुराने कानून की उपयोगिता समाप्त हो चुकी है। भूमि अधिग्रहण के लिए नए कानून के तहत बाजार भाव से चार गुना तक मुआवजा दिया जाना प्रस्तावित है। अधिग्रहण से प्रभावित भूमि में अधिकतम डीएलसी दर 25 लाख 20 हजार 484 रुपए है, जबकि एसडीएम की रिपोर्ट के अनुसार भूमि की बाजार दर तो डीएलसी से दस गुना अधिक है। इस हिसाब से प्रति बीघा दस करोड़, 8 लाख, 36 हजार रुपए प्रतिकार बनता है। लीगल मित्र संस्था के बाड़मेर परियोजना अधिकारी विक्रमसिंह तारातरा ने परियोजना के तहत बिना सर्वेक्षण व परियोजना का पर्यावरण पर प्रभाव की जानकारी दी।

नए अधिनियम की पालना करें तो जमीन देने को तैयार

किसान नेता छगन सिंह ने कहा कि आरएसएमएमएल की ओर से नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया शुरू की जाती है तो किसान भूमि देने को तैयार है। जिसके तहत पॉलिसी की क्रियान्विति सुनिश्चित की जानी चाहिए। हरिसिंह आंटा ने कहा कि अगर सरकार नए अधिनियम से भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया शुरू करवाएं तो ठीक है, वरना प्रभावित किसान कोर्ट में जाएंगे। प्रेस कांफ्रेंस में दुर्जनसिंह, सोहन सिंह, शंभूसिंह, झल्ला राम, केवलचंद, देवाराम मेघवाल, परमसिंह शिवकर, मनसाराम, इमाम खां, रविन्द्र सिंह, वीरसिंह, पन्ने सिंह, यूथ कांग्रेस बाड़मेर जैसलमेर उपाध्यक्ष लक्ष्मण गोदारा, जसवंत सिंह, जोग राजसिंह समेत कई किसान प्रतिनिधि मौजूद थे।