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मुनि शांतिप्रिय सागर को डॉक्ट्रेट की उपाधि
बाड़मेर. बाड़मेर निवासी मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज को जेएनवीयू जोधपुर द्वारा चंद्रप्रभ का दर्शन साहित्य, सिद्धांत एवं व्यवहार्य विषय पर शोध-प्रबंध लिखने पर दर्शनशास्त्र में पीएच.डी की उपाधि दी है। अब वे अपने नाम के साथ डॉक्ट्रेट की उपाधि का भी उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने अपना यह शोध कार्य दर्शन विभाग के प्रोफेसर डॉ. बिमला भंडारी के मार्गदर्शन में किया। जैन परिवार के संपादक लूणकरण सिंघवी ने बताया कि मुनि शांतिप्रिय सागर ने राष्ट्रीय संत ललितप्रभ सागर एवं महान चिंतक संत चंद्रप्रभ महाराज के सानिध्य में मात्र साढ़े सात वर्ष पूर्व ही बाड़मेर के मेला मैदान में जनसमूह के बीच संयम ((दीक्षा)) जीवन अंगीकार किया। वे कल्याणपुरा निवासी पोकरदास मालू, सुआ मालू के पुत्र हैं। वर्तमान में वे जोधपुर के कायलाना रोड स्थित साधना तीर्थ संबोधि धाम में साधना-स्वाध्याय रत हैं। डॉक्ट्रेट होने पर मुनि प्रवर का शहर विधायक मेवाराम जैन, नगर सभापति उषा जैन, जैन समाज के अध्यक्ष नैनमल भंसाली, खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष मांगीलाल मालू, अचलगच्छ संघ अध्यक्ष बच्छराज वडेरा ने बधाई दी। स्थानकवासी संघ प्रमुख दिनेश लूणिया ने बताया की तेरापंथ दार्शनिक पहलुओं की मीमांसा की है।