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तालीम की तरजीह से मिसाल बनी थार की बेटियां
पूनम सिंह राठौड़ - बाड़मेर
शिक्षा रूपी उजाले से जिंदगी रोशन करने का ख्वाब संजोएं बेटियों की तरक्की की राह में शिक्षा के अधूरे इंतजाम रोड़ा बन गए है। अभावों में जीने को अभ्यस्त बेटियां अपने ही बूते भले ही नई इबारतें खिल रही है, लेकिन बालिका शिक्षा की व्यवस्थाएं बेमानी साबित हो रही है। हालात यह है कि समूचे जिले में महज 10 सैकंडरी व 15 सीनियर सैकंडरी स्कूल है।
गांवों में बेटियों की शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा तो अभिभावक भी बेटियों को तालीम देने के पक्षधर है। मगर सरकार व जनप्रतिनिधि बालिका शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। नतीजतन सरहदी जिले में दशकों बाद ग्राम पंचायत मुख्यालय पर बालिका स्कूल की दरकार है। आठवीं तक की पढ़ाई के बाद कक्षा नौंवी में प्रवेश लेने के लिए अलग से बालिका स्कूल की जरूरत होती है। खास बात यह है कि पंचायत तो दूर उपखंड मुख्यालय पर बालिका स्कूल नहीं होने से बीस से तीस किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांवों की बेटियां को सरकारी उपेक्षा का दंश भोगना पड़ रहा है।