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तनसिंह की विचारधारा से विश्व कल्याण संभव : मांडपुरा
भास्कर न्यूज. सिवाना
श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक तनसिंह जयंती का मुख्य समारोह कस्बे के कल्ला रायमलोत राजपूत छात्रावास में शनिवार को वरिया महंत नारायण भारती महाराज के सानिध्य में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया। उसके बाद तनसिंह की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। समारोह में श्री क्षत्रिय युवक संघ के स्वयंसेवकों व राजपूत समाज के गणमान्य लोगों, महिलाओं, पुरुषों व युवाओं ने बड़ी संख्या में
भाग लिया।
समारोह को संबोधित करते हुए देवीसिंह मांडपुरा ने कहा कि तनसिंह महान व्यक्ति थे, जिनके जीवन का व्यक्तित्व संत स्वरूप था। उन्होंने कठोर जीवन जीते हुए हमेशा सत्य के लिए संघर्षशील रहे। वर्ष 1946 में श्री क्षत्रिय युवक संघ की स्थापना कर समाज, प्रदेश, देश ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व कल्याण के लिए एक नई सोच ((विजन)) कायम की। उनकी सोच व सिद्धांत तथा विचारधारा पर चलें तो विश्व का कल्याण हो सकता है तथा मनुष्य को जीते जी मुक्ति मिल सकती है। इसके लिए सर्व प्रथम क्षत्रिय समाज के लोगों को उनके बताए आदर्शों व विचारधारा के अनुरूप चलने का संकल्प लेना होगा तथा समय को व्यर्थ न गंवाते हुए बदलाव लाएं। विधायक हमीरसिंह भायल ने कहा कि तनसिंह महापुरुष व त्यागी, संघर्षशील व समाज व देश के प्रति समर्पित थे। उनके आदर्शों व बताए संस्कारों को जीवन में उतारें। उन्होंने भावी पीढ़ी को शिक्षित व संस्कारवान बनाने का आह्वान किया। पूर्व विधायक कानसिंह कोटड़ी ने कहा कि तनसिंह एक महान पुरुष थे। जिन्होंने समाज व देश के लिए अपना जीवन समर्पित कर सामाजिक उत्थान के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने। हमें उनकी प्रेरणा लेकर शिक्षा व संस्कार से भावी पीढ़ी को जोडऩा चाहिए। क्षत्रिय युवक संघ के राजेंद्रसिंह भियाड ने कहा कि तनसिंह एक उच्च कोटि के साहित्य निर्माता थे। साथ ही एक अच्छे राजनीतिज्ञ भी थे। जिनका राजनीतिक कार्यकाल पूर्ण रूप से पारदर्शी था। उनका जीवन ही उनका संदेश था। ऐसे महापुरुष हमें गौरवांवित करते हैं। संघ के समन्वयक चंदनसिंह चांदेसरा ने कहा कि तनसिंह की सोच को पूरा करने के लिए एक संकल्प लेकर उनके बताए मार्गों व आदर्शों पर चलना चाहिए। संघ के अमरसिंह अकली ने संघ से जुड़कर भावी पीढ़ी को संस्कारवान शिक्षा देने की बात कही। युवा स्वयंसेवक सीमा कंवर भूरटिया ने संघ के शिविरों में भावी पीढ़ी को भेजकर संस्कारवान बनाने व जीवन संस्कृति को अपनाने का आह्वान किया। इसी प्रकार उज्जवलसिंह बिशाला ने कहा कि तनसिंह ने समाज के लिए संपूर्ण जीवन समर्पित किया। हम उनकी प्रेरणा को आगे बढ़ाएं। संघ के भैरूसिंह पादरू व मनोहरसिंह सिणेर ने काव्य पाठ व सहगीत प्रस्तुत कर तनसिंह के त्याग तपस्या व संघर्ष की व्याख्या की। इस दौरान संघ के प्रांत प्रमुख मूलसिंह काठाड़ी, मनोहरसिंह सिणेर, राणसिंह टापरा, स्वरूपसिंह भूरटिया, रिड़मलसिंह बेरसियाला, सोहनसिंह कालेवा, छतरसिंह सांगू, देवीसिंह दाखां, पूर्व प्रधान मूलसिंह भायल, प्रेमसिंह पादरू, गंगासिंह कांखी सहित गणमान्य लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन चंदनसिंह चांदेसरा ने किया। मूलसिंह काठाड़ी ने आभार जताया।