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लोक संस्कृति को आगे ले जाती है राजस्थानी
बाड़मेर. राजस्थानी भाषा राजस्थान के लोगों की मातृ भाषा होने के साथ राजस्थानी संस्कृति की पहचान है। भाषा लोगों को बांधती है तथा यह संस्कृति को आगे ले जाती है। भाषा के बिना राजस्थान की संस्कृति की कल्पना बेमानी है। ये विचार मुख्य वक्ता वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार ओम प्रकाश गर्ग मधुप ने गणतंत्र दिवस पर राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति द्बारा तरुण माध्यमिक स्कूल में आयोजित राजस्थानी बंतल कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कही। समारोह में मुख्य अतिथि प्रेमजीत धोबी ने कहा कि राजस्थानी भाषा के बिना राजस्थान की कल्पना नहीं की जा सकती।समारोह में राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के महामंत्री डॉ. लक्ष्मीनारायण जोशी ने कहा कि आठवीं अनुसूची में जुडऩे से प्रदेश के बच्चों को राजस्थानी तृतीय भाषा के रूप में लेने की सुविधा मिलेगी।