सोच बदलेंगे तो तकदीर बदल जाएगी
भास्कर न्यूज - बाड़मेर
हेल्थ और वैल्थ जीवन की दो ऐसी जरूरते हैं जिसकी सदियों से चाहत रही है। समय के साथ बदलाव आता गया और हमारे पूर्वजों ने जहां ‘पहला सुख निरोगी काया’ के सिद्धांत पर स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। वहीं, 21वीं सदी में दुनिया की चकाचौंध ने लोगों को पैसों की तरफ खींचा।
नतीजा लोग स्वास्थ्य को भूलते गए और धन कमाने के चक्कर में हाई-पर टेंशन तथा शुगर जैसी बीमारियां पालते गए। ये विचार टियांसी समूह के प्रमुख ट्रेनर शेख आबु जैद ने एक निजी होटल में आयोजित हेल्थ एंड वैल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमें सोच को बदलना होगा तो तकदीर बदल जाएगी। आज जरूरत इस बात की है कि हम कितने धैर्य, संयम, योजनाबद्ध तरीके से पैसा व स्वास्थ्य का किस तरह से उपयोग करते हैं। जैद ने कहा कि भारत की प्रतिभाओं का परचम पूरे ग्लोबल में लहरा रहा है। लेकिन हम अपनी प्रतिभाओं को नहीं समझ सके। काम हम करते हैं और नाम दूसरे कमाते हैं। सुआ देवी व उनके पति बसंतराज पंवार ने कई लोगों का उचित मार्गदर्शन दिया।