अब पांच मंजिला ‘महल’ में रहेंगे कबूतर
लाखाराम जाखड़ - बाड़मेर
अपने लिए तो हर कोई जीता है जीना है तो औरों के लिए जीए। इसी का नाम है जिंदगी। यह कहावत तभी सार्थक साबित होगी जब हम अपने स्वार्थ का त्याग औरों के लिए कुछ कर दिखाने का प्रण लें। बाड़मेर जिले में ही एक संस्था ने जन सेवा के साथ पक्षियों की सेवा का भी जिम्मा उठाया है। यह गांव है सेतराऊ जहां मनुष्य के लिए नहीं पक्षियों के लिए बन रहा है पांच मंजिला महल। जिसमें पक्षी प्रजनन से लेकर विश्राम, भोजन, पानी की समुचित व्यवस्थाएं की गई है। सेतराऊ गांव में पक्षियों के लिए शहर एवं आबादी क्षेत्र से दूर ‘पक्षी महल’ का निर्माण करवाया जा रहा है। जिसमें पक्षियों के लिए पानी, अनाज, प्रजनन, चुग्गा सहित अन्य समुचित व्यवस्थाएं रहेगी। पर्यावरण संरक्षण के इस अनोखे महल को देख हर किसी के मन में सेवा का भाव जाग रहा है। सेतराऊ गांव में हितकारी सेवा संस्थान के सहयोग से पांच मंजिला पक्षी विहार का निर्माण करवाया जा रहा है।
पहला पक्षी महल बाड़मेर में
इनका कहना है
करीब 7 लाख आएगी लागत
जिले में पक्षियों के लिए वर्ष 2009 में पक्षी प्रेमी हनुमानराम डऊकिया की देखरेख में सिणधरी मार्ग पर पक्षी महल का निर्माण किया गया। जहां आज भी सैकड़ों की संख्या में पक्षी निवास करते है। जिनके लिए पानी, प्रजनन, भोजन सहित सभी व्यवस्थाएं है। पिछले कई सालों से हनुमानराम डऊकिया पक्षियों की सेवा का काम रहे है। जिसके बाद सेतराऊ के उम्मेदाराम सियाग ने डऊकिया से प्रेरणा लेकर पक्षियों की सेवा करने की जिम्मेदारी ली है।
॥बढ़ते प्रदूषण में पक्षियों की प्रजाति के विलुप्त होने व भीषण गर्मी में पक्षियों की हो रही मौत को देखते हुए मन में पक्षियों की सेवा करने की जिज्ञासा जगी। 22 अप्रेल 2011 को पृथ्वी दिवस के मौके पर उम्मेदाराम ने भी मेरे से पक्षियों की सेवा में सहयोग की भावना के साथ पक्षी महल बनाने का दृढ़ निश्चय किया।’’ -हनुमानराम डऊकिया
पक्षी प्रेमी व सचिव हितकारी सेवा संस्थान
हितकारी सेवा संस्थान के उम्मेदाराम सियाग की ओर से बनाए जा रहे पांच मंजिला पक्षी महल की लागत करीब सात लाख रुपए आएगी। जिसके लिए अगस्त 2013 में काम शुरू हुआ है, जो जून अप्रेल 2014 तक पूरा होगा। पक्षी महल में पक्षियों के रहने से लेकर खाने-पीने तक अलग-अलग क्वार्टर की व्यवस्था की गई है। जहां प्रजनन, आवास, भोजन व पानी की व्यवस्था रहेगी।
यह है ‘पांच मंजिला पक्षी महल’
अंडरग्राउंड : पानी टैंक, प्रथम फ्लोर : अनाज भंडारण
सेकंड फ्लोर : प्रजनन व आवास
थर्ड फ्लोर : चुग्गा व भोजन
फोर्थ फ्लोर : विश्राम व पानी
सेतराऊ गांव में बन रहा है कबूतरों व पक्षियों के लिए महल