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गरीब बच्चों को पढ़ाने की फीस नहीं मिली

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जैसलमेर

मिश्रीलाल सांवल राजकीय महिला महाविद्यालय के रेड रिबन क्लब के तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन बुधवार किया गया। जिसमें छात्राओं ने उत्साह से भाग लिया। क्लब की संयोजिका डॉ. रमा अरोड़ा ने बताया कि कार्यशाला का आयोजन दो सत्रों में किया गया। प्रथम सत्र में डॉ. उषा पुरोहित ने उन्हें एड्स रोकथाम तथा एचआईवी संक्रमण विषय पर व्याख्यान दिया।

द्वितीय सत्र में छात्राओं के लिए काव्य रचना व कविता प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्राओं ने रक्तदान संबंधी भ्रांतियों को दूर करने के बारे में बताया। जीवन बचाने के लिए रक्तदान करना चाहिए। डॉ. रमा अरोड़ा ने बताया कि रक्तदान से पहले सुरक्षित जांच कर लेनी चाहिए तथा स्वस्थ व्यक्ति ही रक्तदान करें। काव्य रचना में श्रवण कंवर रतनू प्रथम रहीं। कुसुम टाक व लाछा द्वितीय रहीं। उषा रामावत ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सांस्कृतिक सप्ताह के तहत आयोजित गतिविधियों मे नारा लेखन के परिणाम प्राचार्य डॉ. पीके. जोशी ने घोषित किए। जिसमें प्रियांशा चौहान ने प्रथम, लाछा ने द्वितीय तथा शिवानी भाटिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

: भीखोड़ाई. कस्बे में चल रही भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालु व कथा के दौरान कृष्ण के रूप में सजा बालक।

भागवत कथा में उमड़ रहे श्रद्धालु

भास्कर न्यूज - भीखोड़ाई

पिछले चार दिन से कस्बे में चल रही भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह से पूरा गांव धार्मिक भावनाओं से सराबोर हो गया है। कथा के चौथे दिन वामन अवतार व कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंगों पर कथा वाचक राजेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने विस्तार से वर्णन किया। भागवत कथा पर

प्रवचन करते हुए शास्त्री ने कहा कि किसी से छीनकर या किसी को मूर्ख बनाकर कमाया गया धन व्यक्ति को उल्लू बना देता है। संस्कार युक्त परिवार बिना लक्ष्मी के भी सुखी रहता है। संस्कारों से ओत प्रोत निर्धन परिवार में भी शांति व सुख की सुगन्ध फैली रहती है। प्रवचनों के दौरान कृष्ण जन्म के अवसर शानदार नंद महोत्सव का आयोजन किया गया। प्रवचनों के दौरान जैसे ही कृष्ण जन्म का प्रसंग आया वैसे ही पूरे पांडाल में उपस्थित श्रोता नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की के नारों से पूरा पांडाल गुंजायमान कर दिया।

गांवों में पेयजल संकट गहराया

रामगढ़. कस्बे से 35 किमी दूर मोकला गांव में लंबे समय पेयजल किल्लत बनी हुई है। ऐसे में स्थानीय वाशिंदों के साथ पशुधन भी पीने के पानी के लिए दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं।

ग्रामीण आशाराम ने बताया कि गांव में बनीं पानी की टंकी में पानी सप्लाई किए करीब डेढ़ वर्ष हो गया वही गांव में स्थित पारंपरिक जल स्रोत का पानी भी अब खत्म हो गया है। पेयजल संकट के चलते ग्रामीण मंहगे दाम चुकाकर टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि इस समस्या बाबत हमने प्रशासन गांवों के संग अभियान में अवगत करवाने के बावजूद इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं। गांव से दस किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में एक ट्यूबवेल हे जिससे गांव वालों को खारा पानी सप्लाई किया जाता है वो भी बंद होने के कारण पेयजल किल्लत बनीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में पेयजल के पानी की आपूर्ति करने की मांग की है।

जैसलमेर. संतु भील की ढाणी के ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर पेयजल संकट से निजात दिलाने की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया कि ढाणी आजादी के समय से आबाद है और यहां 250 भील परिवार रहते हैं। यहां पानी की टंकी बनी हुई लेकिन पिछले छह माह से पानी नहीं आया है। इस संबंध में जलदाय विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया लेकिन समस्या जस की तस है। ग्रामीणों ने शीघ्र ही आपूर्ति सुचारू करने की मांग की है। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में मनोहर, नरसिंगराम, रमेश कुमार, अमृत राम, राजेश कुमार, अशोक कुमार, तगाराम व प्रगाराम आदि शामिल हैं।

भास्कर न्यूज - जैसलमेर

सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों को गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाने के आदेश तो जारी कर दिए लेकिन इसकी क्रियान्विति सुचारू ढंग से अभी भी नहीं हो रही है। तीन साल बीत गए हैं लेकिन अभी तक यह व्यवस्था पटरी पर आती हुई दिखाई नहीं देती है। पहले साल में जहां योजना सुचारू नहीं चली और गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए निशुल्क बच्चों को पढ़ाने की फीस निजी विद्यालयों को नहीं दी गई। वहीं दूसरे साल में भी भौतिक सत्यापन आदि करने में समय लग गया और उसके बाद जाकर भुगतान हुआ। इसी क्रम में इस बार भी यही हालात है। निशुल्क प्रवेश की सूचियां जुलाई में तैयार हो गई और उसके बाद भौतिक सत्यापन भी अधिकारियों द्वारा कर दिया गया। अक्टूबर माह में भुगतान होना था जो जनवरी माह के अंत तक नहीं हो सका है। गौरतलब है कि इस योजना में प्रत्येक निजी विद्यालय को नवप्रवेशित बच्चों में से 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को निशुल्क प्रवेश देना होता है। शिक्षा विभाग की ओर से इसकी पूरी मॉनिटरिंग की जाती है। इसके बदले में निजी विद्यालयों को उनके स्तर के हिसाब से प्रत्येक बच्चे की सालाना फीस सरकार की ओर से दिए जाने का प्रावधान है।

२हजार ११२ बच्चों का भुगतान बकाया

जिले 177 निजी स्कूलों का निशुल्क शिक्षा के तहत 36 लाख 60 हजार 554 रुपए का भुगतान बकाया है। स्थानीय शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इनका बिल बनाकर बीकानेर कार्यालय भिजवा दिया है लेकिन अभी तक वहां से भुगतान राशि स्वीकृत नहीं हुई है। कुल 2 हजार 112 बच्चों का भुगतान शेष है। इसमें 802 ऐसे बच्चे हैं जिनका प्रवेश गत वर्ष हुआ था और वे इस बार अगली कक्षा में आ गए हैं।

इस बार 1310 निशुल्क प्रवेश हुए

जिले की निजी स्कूलों ने 25 प्रतिशत के हिसाब से इस बार 1310 बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया। जिसमें 870 छात्र और 440 छात्राएं शामिल है। जैसलमेर ब्लॉक में 333 छात्र और 186 छात्राएं, पोकरण ब्लॉक में 404 छात्र व 174 छात्राएं तथा सम ब्लॉक 133 छात्र व 80 छात्राओं को निशुल्क प्रवेश मिला है।





उदासीनता - जिले की 177 निजी स्कूलों का 36.60 लाख का भुगतान बकाया