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कलेक्ट्रेट में अटके चार जीएसएस

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बाड़मेर

शहर में विद्युत व्यवस्था सुधारने के लिए स्वीकृत 33 केवी के चार जीएसएस का निर्माण अधरझूल में लटका हुआ है। जीएसएस के लिए वांछित जमीन से संबंधित फाइल कलेक्ट्रेट में मंजूरी का इंतजार कर रही है। जमीन चिन्हित कर नगर परिषद व संबंधित अधिकारियों की अनुमति के बाद फाइल पिछले सात माह से कलेक्ट्रेट में धूल फांक रही है, अभी तक उस पर मुहर लगनी बाकी है। जोधपुर डिस्कॉम की ओर से इस संबंध में सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली

गई हैं।

पेट्रोलियम हब बनने के बाद बाड़मेर में लिविंग स्टेंडर्ड बढ़ा है। साथ ही आबादी में विस्तार हुआ है, इसके कारण विद्युत लोड भी बढ़ गया है। शहर में होटलों की संख्या बढऩे और घरों में भी एसी लगने लगने के कारण बिजली की मांग ज्यादा बढ़ी है, इसके मुकाबले इन्फ्रास्ट्र - र कम है। इसी कारण बार-बार शट डाउन व फॉल्ट की समस्या आती है। ऐसी स्थिति में डिस्कॉम ने शहर में चार जीएसएस बनाने के लिए वित्तीय मंजूरी जारी की थी, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति के लिए यह फाइल पिछले सात माह से कलेक्टर कार्यालय में ही अटकी है। इस फाइल पर कलेक्टर से मंजूरी के लिए डिस्कॉम के चीफ इंजीनियर, एसई, एक्सईएन, और अन्य अधिकारी कई बार कलेक्टर के समक्ष जीएसएस की प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने के लिए गिड़गिड़ा चुके है।

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टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही जीएसएस निर्माण के लिए संबंधित ठेकेदार काम शुरू करने के लिए तैयार है और मेटेरियल भी पहुंच गया। जब निर्माण के लिए डिस्कॉम अधिकारियों से मिला तो वहां पता चला कि फाइल अब तक जमीन के लिए मंजूरी मिलना बाकी है।

सीटी मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक पिछले छह माह से नहीं हुई है। नियमानुसार प्रतिमाह सीएमसी की बैठक किए जाने का प्रावधान है। नगर परिषद सभापति उषा जैन व नगर परिषद अधिकारियों के मुताबिक पिछले सात माह से सीएमसी की बैठक नहीं हुई है। जिससे शहरी विकास व जन सुविधा की योजनाएं अटकी हुई है।

सीएमसी ((सीटी मॉनिटरिंग कमेटी)) शहरी विकास व बड़ी योजनाओं की क्रियान्विति के लिए जिला प्रशासन, नगर परिषद व अन्य विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक होती है। जिसमें शहरी विकास व अन्य बड़े कार्यों को लेकर निर्णय लिए जाते है। लघु व मध्यम शहरों का एकीकृत विकास कार्यक्रम के तहत शहरी विकास की योजनाएं तय होती है। बाड़मेर में तो पिछले सात माह से सीएमसी की बैठक तक नहीं हुई। जिससे शहरी विकास को लेकर कई काम-काज प्रभावित हो रहै है। पिछले छह-सात माह से सीएमसी की बैठक नहीं हुई है। महावीर नगर इस सीटी मॉनिट्ररिंग कमेटी के तहत आता है। जिससे यहां बड़े काम-काज का निर्णय इस बैठक में ही लिया जाना है।

शहर के महावीर नगर, अरिहंत नगर, गेंहूं रोड व हॉस्पिटल में जीएसएस का निर्माण प्रस्तावित हैं। इसके लिए डिस्कॉम ने पूरी कार्य योजना तैयार कर नगर परिषद की स्वीकृति के बाद फाइनल मुहर के लिए जुलाई, 2013 में कलेक्टर के पास भेज दी, जहां से अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

बाड़मेर शहर की आबादी बढऩे के साथ बिजली उपभोक्ताओं का भी भार बढ़ गया है। करीब 35 हजार विद्युत उपभोक्ता है। अभी शहर में केवल चार जीएसएस है, जिन पर शहर की विद्युत व्यवस्था टिकी हुई है, वहीं करीब दस गुणा विद्युत लोड बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में विद्युत लोड बढऩे के साथ ही बार-बार आ रही फॉल्ट की समस्या को दूर करने के लिए शहर के चार स्थानों पर जीएसएस बनाए जाने की योजना है।