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सरसों मेें तना गलन सफेद रोली का प्रकोप

8 वर्ष पहले
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बानसूर. कृषि विज्ञान केन्द्र बानसूर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. पंकज शर्मा ने क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर सरसों की फसल का अवलोकन किया। शर्मा ने बताया कि फसल में वर्षा पूर्व की गई सिंचाई, तापमान में कमी तथा मृदा में अधिक नमी के कारण तना गलन रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं व रोग की अधिकता ऐसे खेतों मे ज्यादा है जहां पौधों में आपस की दूरी कम है।
सफेद रोली जो पूर्व में पत्तियों पर दिखाई दे रहा था वह भी नमी व कम तापमान से स्टैग-हैड किसान भाषा में जलेबियां बनने लग गई हैं। सफेद रोली से बचाव हेतु टिडोमिल 2-ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि तना गलना ((धोल्या)) रोग-इस समय पत्तियों पर मटमैले, भूरा रंग के सफेद फफोले जिनमें चौड़े छिद्र भी होते हैं, वे फफूंदी जाल से ढके होते हैं। धीरे-धीरे तने पर रोग का प्रकोप होने पर इसमें गलन प्रारंभ हो जाती है व फसल पकाव के समय ऐसे पौधे तने से टूटे हुए दिखाई देते हैं।