अब मीरान ए बाग का होगा विकास / अब मीरान ए बाग का होगा विकास

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Bhaskar News Network

Apr 06, 2014, 03:20 AM IST
अब मीरान ए बाग का होगा विकास
भास्कर न्यूज - धौलपुर
दशकों से उपेक्षित पड़े शहर के मीरान ए बाग की दशा सुधारने के लिए पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने कवायद तेज कर दी है। बाबर गार्डन के नाम से मशहूर इस बाग को पर्यटन स्थल के रूप में डवलप करने की योजना है।
इस योजना पर 2 अक्टूबर 1989 को जारी पुरातत्व विभाग की अधिसूचना के साथ ही कवायद शुरू हो गई थी, लेकिन अभी तक यह मामला केवल पत्र व्यवहार तक ही सीमित था। पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के आला अधिकारियों ने मौका मुआयना कर इसके विकास के संकेत दे दिए है। इस कवायद में सबसे बड़ी अड़चन करीब 60 बीघे के अधिग्रहण को लेकर है। केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने 9 फरवरी 2009 को ही जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अधिग्रहण के लिए मुआवजा तय करने के निर्देश दे दिए थे। बावजूद इसके मुआवजे का निर्धारण अभी तक नहीं हो सका है।




1527 में बना था स्ट्रक्चर

मुगल शासक ने अपने आरामगाह के रूप में वर्ष 1527 में इस स्ट्रक्चर का तैयार कराया था। बाबर यहां युद्ध के सिलसिले में आया था और उसे यहीं पर ढाई साल तक रुकना पड़ गया। ऐसे में उसने अपने आरामगाह एवं शिकारगाह के रूप में इस स्ट्रक्चर का निर्माण कराया। आगरा एवं कश्मीरी शैली में बने इस स्ट्रक्चर के चारों कोनों पर कुएं एवं बीच में बनी बावड़ी हमेशा पानी से लबालब रहती थी। स्ट्रक्चर के बीच में ही पत्थरों को काटकर कमल की पंखुडिय़ों के रूप में बने छोटे-छोटे तालाब एवं फव्वारे इसके आकर्षण के प्रमुख केंद्र है। इसी खासियत के चलते इसे लोटस गार्डन भी कहते है। इस गार्डन में गुप्त नालियों के जरिए बावड़ी से ही पानी की सप्लाई होती थी। इन नालियों के अवशेष अभी भी कई जगह देखे जा सकते है।

अमरीकी महिला ने खोजा था यह स्थान

बाबर गार्डन की खोज 1978 में भारत में तत्कालीन अमरीकी राजदूत की पत्नी एवं इतिहासकार डेनियल मोनिहटन ने किया था। वह बाबर की आत्मकथा तुजके बाबरी पढ़कर यहां पहुंची थी। यहां आने के बाद उन्होंने इस किताब में दिए स्थानों की खुदाई कराई। इस खुदाई में कई प्राचीन संरचनाओं के अवशेष मिले। उसके बाद पुरातत्व विभाग ने भी यहां आकर संरचनाओं का अध्ययन किया और दो अक्टूबर 1989 को इसे आरक्षित क्षेत्र घोषित कर नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इससे पहले 1933 में तत्कालीन नरेश के नायब सरदार रणबीर सिंह द्वारा लिखित पुस्तक धौलपुर गजट एवं गुलबदन बेगम द्वारा रचित गुल ए नगमा में भी इसका जिक्र है।



पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने शुरू की कवायद

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