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प्रतिस्पर्धा के युग में मानवीय मूल्य महत्वपूर्ण
भास्कर न्यूज - लक्ष्मणगढ़
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन का कहना है कि वर्तमान प्रतिस्पर्धा के युग में मानवीय मूल्य बहुत ही
महत्वपूर्ण हैं।
शुक्रवार को मोदी संस्थान के अभियांत्रिकी विभाग के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे अपने ज्ञान व प्रतिभा का उपयोग अपने भविष्य निर्माण के साथ सामाजिक बुराइयों को दूर करने में भी करें। छात्राएं अपनी ऊर्जा व ज्ञान का उपयोग उन लोगों के जीवन में प्रकाश लाने की दिशा में करें जो आज हाशिए पर जीवन जीने को मजबूर हैं। संस्थान के संचालक व मोदी तकनीकि व विज्ञान संस्थान के कुलाधिपति राजेंद्र प्रसाद मोदी की मौजूदगी में कुलपति प्रो. एनवी सुब्बारेड्डी ने संस्थान के आठवें दीक्षांत समारोह के शुभारंभ की घोषणा की। शंखनाद, गायत्री मंत्र व सरस्वती वंदना से शुरू हुए दीक्षांत समारोह में छात्राओं को स्नातक व अधिस्नातक के साथ ही संस्थान के विभिन्न संकायों में शोध कार्य पूरा करने वाले शोधार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई। दीक्षांत समारोह में चेयरमैन एसएस भुवानिया, अभियांत्रिकी विभाग के डीन प्रो. जेवी देसाई, प्रबंध संकाय डीन प्रो. एस दुर्गाप्रसाद, विधि संकाय डीन प्रो. सतीश सी शास्त्री, रजिस्ट्रार डॉ. विनोद पुरोहित, कला विज्ञान व वाणिज्य संकाय डीन डॉ. सुनील जाखोरिया, मोदी स्कूल प्रिंसिपल रेणु सहगल, जीएम केके माहेश्वरी, जीएम सर्विसेज गिरीश सहगल, जीएम इंजीनियरिंग कर्नल मधुसूदन शर्मा, जीएम फूड एंड ब्रेवरीज तपन भट्टाचार्य, संस्थान के प्रेस सूचना अधिकारी प्रो. एके दास सहित संस्थान परिवार के सदस्य, अभिभावक व छात्राएं मौजूद रही। डॉ. संगीता झाझरिया व गिरिराज किराड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
रंगमंच पर साकार हुई सांस्कृतिक विविधता: दीक्षांत समारोह के बाद सायंकालीन सत्र में अभियांत्रिकी संकाय की छात्राओं ने रंगमंच पर अपनी प्रस्तुतियों के जरिए भारत की सांस्कृतिक विविधता को साकार किया। रंगीन लेजर लाइट्स की रोशनी में छात्राओं कीे राजस्थानी केशरिया बालम से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों के बाम्बू डांस की शानदार प्रस्तुतियों पर पूरे पांडाल ने तालियां बजाकर व हूटिंग कर उत्साहवर्धन किया।
रामकथा में कैकेयी-दशरथ संवाद का मार्मिक चित्रण : संस्थान में समारोह के साथ चल रही रामकथा में शुक्रवार को दशरथ-कैकेयी संवाद का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती ने कैकेयी द्वारा दशरथ से दो वर मांगने का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि परिस्थिति चाहे अनुकूल हो या प्रतिकूल, व्यक्ति को हमेशा समान भाव रखना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में अभिमान नहीं करना चाहिए। क्योंकि अभिमान मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
कवि सम्मेलन आज : समारोह के चौथे दिन शनिवार को कवि सम्मेलन होगा। इसमें देश के ख्यातनाम कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेगें। इससे पहले संस्थान के प्रबंध संकाय, कला विज्ञान व वाणिज्य संकाय तथा विधि संकाय का पुरस्कार वितरण व सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा।