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बढ़े गेहूं आवंटन से जनता बेखबर, विभाग ने नहीं की मॉनिटरिंग

7 वर्ष पहले
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सीकर. खाद्य सुरक्षा में चयनित ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को फायदा देने के लिए सरकार ने शहरी उपभोक्ताओं का हिस्सा छीन लिया। इससे ग्रामीणों को तो फायदा नहीं मिला। लेकिन डीलरों की मौज हो गई। प्रशासन ने मॉनिटरिंग तो की ही नहीं बल्कि ग्रामीणों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। मौका लगते ही कई डीलरों ने बढ़ा हुआ कोटा दबा लिया। इसका बड़ा उदाहरण चार दिन पहले पाटन क्षेत्र में पुलिस व रसद विभाग की संयुक्त कार्रवाई में सामने आ चुका है। अब रसद विभाग इसकी जांच में जुटा हुआ है। खाद्य सुरक्षा योजना में सीकर जिले के चार लाख 39 हजार परिवारों के लिए 9514 की बजाय 7115 मिट्रिक टन गेहूं का आवंटन हो रहा है। दिसंबर तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के डीलरों को बराबर-बराबर 66 फीसदी गेहूं का आवंटन किया जाता रहा। सरकार ने जनवरी से शहरी कोटा 13 फीसदी कम कर ग्रामीण क्षेत्र का कोटा बढ़ा दिया। इसमें ग्रामीण डीलरों को 79 फीसदी गेहूं मिलने लगा। लेकिन रसद विभाग ने न आमजन को इसकी जानकारी दी, न ही विभाग ने वितरण की मॉनिटरिंग की। इससे डीलरों को कालाबाजारी का मौका मिल गया।
॥मॉनिटरिंग के अभाव में गेहूं सही ढंग से वितरित नहीं हो रहा है। सरकार की मंशा ठीक नहीं है। एक भी एसडीओ ने अपने इलाके में राशन दुकान का निरीक्षण तक नहीं किया है।
परसादीलाल मीणा, पूर्व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री
॥ग्रामीण इलाकों में जनवरी महीने से गेहूं का ज्यादा आवंटन शुरू किया गया है। पाटन का मामला सामने आने के बाद अन्य इलाकों में भी जांच करवाई जा रही है।
जयसिंह शेखावत, डीएसओ