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डाउनलोड करेंसूरतगढ़। राजस्थान एनआरएचएम नर्सेज एसोसिएशन ने गुरुवार को नर्सेज कर्मियों की नियमितिकरण की मांग को लेकर दो घंटे तक कार्य का बहिष्कार किया। इस दौरान एसोसिएशन ने सीएम के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंप सर्वोच्च न्यायालय से एसएलपी वापस लेकर 15 प्रतिशत बोनस अंकों के आधार पर नर्सेज को नियुक्ति दिलवाने की मांग की।
अध्यक्ष नंदलाल वर्मा के नेतृत्व में नर्सेज कर्मियों ने अधिकारी को दिए ज्ञापन में लिखा है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नर्सेज की अस्थायी वरियता सूची के आधार पर दस्तावेज सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया था। बोनस अंक विवाद को लेकर हाईकोर्ट की वृहद पीठ का फैसला भी आ चुका है। नर्सेजकर्मी इसी फैसले के अनुसार राज्य सरकार से नियुक्ति की उम्मीद करते हैं।
ज्ञापन में लिखा है कि एनआरएचएम के तहत पांच से सात वर्ष पहले संविदा पर लगे नर्सेज कर्मियों को स्थायी करने के लिए 70 प्रतिशत शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक अंकों की मेरिट तथा 30 प्रतिशत अनुभव के आधार पर बोनस अंकों का निर्धारण कर 2013 में 28 हजार नर्सेज भर्ती निकाली गई। यह भर्ती बोनस अंक विवाद के कारण कानूनी दाव पेच में उलझ गई। तब हाईकोर्ट की वृहद पीठ ने फैसला सुनाते हुए बोनस अंक 30 प्रतिशत की बजाए 15 प्रतिशत कर दिए।
इसके बाद पूर्ववर्ती सरकार ने इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी, जिसकी प्रथम सुनवाई में फैसले के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया था, तब विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई थी। अब छह जनवरी को सुनवाई में सर्विस पूर्ण नहीं होने के कारण फिर से सुनवाई के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। तब तक लोकसभा चुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता लग जाएगी और संविदाकर्मियों की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा।
नर्सेज एसोसिएशन ने ज्ञापन में लिखा है कि सरकार एसएलपी को वापस लेकर हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार 15 प्रतिशत बोनस अंकों के आधार पर भर्ती करवाने की प्रक्रिया पूरी करे। अनिल गोदारा, सुखवीर, तरुण सोनी, पूर्ण भाटिया, सुमन मक्खन, माधवी, कमला शर्मा, ओमप्रकाश, दिनेश मीणा, कन्हैयालाल सहित आदि नर्सेजकर्मी उपस्थित थे।
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