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खुदाई में हड़प्पाकालीन मोहर व माप-तोल का बाट मिला

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - भादरा
गांव करनपुरा के पास पुरातत्व विभाग के उत्खनन कार्य के दौरान शनिवार को पुरातत्व वेताओं को हड़प्पाकालीन मोहर व छोटा माप-तोल का बाट मिला है। मोहर पर दो अक्षर लिखे हैं और एक सिंगवाला जानवर एवं पीपल का पत्ता भी उत्कीरण है। पुरातात्विक विभाग के कार्मिकों के अनुसार हड़प्पा कालीन लिपी अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है परंतु संभवत: जो दो अक्षर मोहर पर लिखे हैं वे उस मोहर के व्यापारी का नाम था एवं मोहर उसके व्यापार का टे्रड मार्क। इस तरह की मोहरें हड़प्पा कालीन सभ्यता के अन्य उत्खनन स्थलों पर भी मिली हंै। वहीं मिले एक छोटे वर्गाकार माप-तोल बाट रोड़ी पत्थर का है। इस पत्थर के पहाड़ सदनसिंध ((पाकिस्तान)) में मिलते हैं। इस बाट को पॉलिश किया गया है। इस बाट का वजन करीब ४ ग्राम है। वहीं उत्खनन में एक डिस ऑन स्टैंड मिला है, जिससे लगता है कि इस गांव के लोग काफी संपन्न थे क्योंकि इस तरह के बर्तन हड़प्पाकालीन संपन्न लोग ही प्रयोग में लेते थे।




भादरा. गांव करनपुरा के पास पुरातत्व विभाग की ओर से की गई खुदाई में मिली हड़प्पाकालीन मोहर एवं छोटा बाट।

रहन-सहन और वेशभूषा की भी मिली जानकारी

इसके अलावा उत्खनन के दौरान कई मृदभांड, जानवरों की हड्डियां, मकानों के अवशेष, घड़े, चूडिय़ां व अन्य मिट्टी से बनी चीजें व एक तांबे से बना दर्पण मिला है, जिससे हड़प्पाकालीन लोगों के रहन-सहन, वेशभूषा व खान-पान की जानकारियां मिली है। हालांकि उत्खनन में मिली चीजों का शोध अभी जारी है। पुरातत्व विभाग की टीम काफी समय से गांव करनपुरा में उत्खनन का कार्य कर रही है। यह कार्य अभी और चलेगा। वहीं पुरातत्व वेताओं ने इस बाट व मोहर के आधार पर दावा किया है कि करनपुरा हड़प्पा कालीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वीएन प्रभाकरन ने बताया कि हड़प्पा काल के व्यापारी किसी बड़े बक्से या फिर घड़े में माल को भरकर उसे धागों से सील करते थे और उसकी गांठ पर गीली मिट्टी लगाकर उस मिट्टी पर अपनी मोहर का निशान लगा देते थे।



भादरा के गांव करनपुरा में पुरातत्व विभाग कर रहा है उत्खनन