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फोटो कैप्शन -संख्या-1कैप्शन. सूरतगढ़. सरकारी अस्पताल में बने ट्रोमा सेंटर पर लगा ताला।ट्रोमा सेंटर पर ताला, नहीं हैं डॉक्टर-सरकार बदलने के बावजूद नहीं हो पाई डॉक्टरों की...

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज, सूरतगढ़. पूर्व मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया और नए मुख्यमंत्री ने सत्ता संभाल ली। इसके बावजूद स्थानीय सरकारी अस्पताल में बने ट्रोमा सेंटर पर ताला लगा है। वजह, ट्रोमा सेंटर में अभी तक डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। ऐसे में हादसे के शिकार लोगों को अन्यत्र रैफर होने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि नेशनल हाईवे के निकट सरकारी अस्पताल परिसर में दुर्घटनाओं के शिकार लोगों के तत्काल इलाज के लिए 70 लाख रुपए की लागत से बने ट्रोमा सेंटर के भवन का पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गत वर्ष 12 सितंबर को उद्घाटन किया था। तब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में तीन डॉक्टरों, एक कंपाउडर व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की अस्थाई नियुक्ति की थी। दस-पंद्रह दिन से हल्की चोट के रोगियों का ट्रोमा सेंटर में इलाज शुरू था लेकिन जब से विभाग ने डॉक्टरों को वापस अपने मूल पदों पर लगाया है, तब से ट्रोमा सेंटर पर ताला लगा हुआ है। कस्बे के अलावा दूर-दराज से आने वाले हादसे के शिकार लोगों को मजबूरी में जिला या फिर संभाग मुख्यालय पर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।

नहीं आए पर्याप्त संसाधन: ट्रोमा सेंटर में डॉक्टरों के अभाव के अलावा इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं। यानि यहां उपकरण, एक्स-रे मशीन, सिटी स्कैन सहित चोटिल रोगियों के लिए मरहम-पट्टी जैसे साधन तक उपलब्ध नहीं हैं। यही नहीं, अस्पताल में ब्लड के अभाव में ब्लड स्टोरेज यूनिट पर भी ताला लगा है। जरुरत पडऩे पर रोगियों के परिजन जिला मुख्यालय से ब्लड लाने पर विवश हैं।

अस्पताल में घटने लगे मरीज: सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों के अभाव में दिनोंदिन आउटडोर में आने वाले मरीजों की संख्या घटती जा रही है। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक एक माह पूर्व आउटडोर में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या 450 से 500 तक थी, यह वर्तमान में घटकर 300 से 350 ही रह गई है। उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक-दो रह गई है क्योंकि अस्पताल में नियुक्त 14 में से पांच डॉक्टर ही वर्तमान में कार्यरत हैं। शिशु रोग, नेत्र विशेषज्ञ व फिजीशियन के पद रिक्त चल रहे हैं।

जल्द होगी डॉक्टरों की नियुक्ति: यह सही है कि ट्रोमा सेंटर व अस्पताल में डॉक्टरों का अभाव है। चिकित्सा मंत्री को अवगत करवाने पर उन्होंने तीन डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। दो-तीन दिन में डॉक्टरों की नियुक्ति हो जाएगी।

-राजेंद्र भादू, विधायक सूरतगढ़

लिखा है उच्चाधिकारियों को

ट्रोमा सेंटर व अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए मौखिक व लिखित में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाा है। डॉक्टरों की नियुक्ति करना सरकार के अधीन है।

डॉ. शंकरलाल शर्मा, प्रभारी सरकारी अस्पताल सूरतगढ़





नहीं आए पर्याप्त संसाधन

ट्रोमा सेंटर में डॉक्टरों के अभाव के अलावा इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं। यानि यहां उपकरण, एक्स-रे मशीन, सिटी स्कैन सहित चोटिल रोगियों के लिए मरहम-पट्टी जैसे साधन तक उपलब्ध नहीं हैं। यही नहीं, अस्पताल में ब्लड के अभाव में ब्लड स्टोरेज यूनिट पर भी ताला लगा है। जरुरत पडऩे पर रोगियों के परिजन जिला मुख्यालय से ब्लड लाने पर विवश हैं।

अस्पताल में घटने लगे मरीज

सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों के अभाव में दिनोंदिन आउटडोर में आने वाले मरीजों की संख्या घटती जा रही है। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक एक माह पूर्व आउटडोर में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या 450 से 500 तक थी, यह वर्तमान में घटकर 300 से 350 ही रह गई है। उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक-दो रह गई है क्योंकि अस्पताल में नियुक्त 14 में से पांच डॉक्टर ही वर्तमान में कार्यरत हैं। शिशु रोग, नेत्र विशेषज्ञ व फिजीशियन के पद रिक्त चल रहे हैं।



जल्द होगी डॉक्टरों की नियुक्ति

यह सही है कि ट्रोमा सेंटर व अस्पताल में डॉक्टरों का अभाव है। चिकित्सा मंत्री को अवगत करवाने पर उन्होंने तीन डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। दो-तीन दिन में डॉक्टरों की नियुक्ति हो जाएगी। -राजेंद्र भादू, विधायक सूरतगढ़

लिखा है उच्चाधिकारियों को

ट्रोमा सेंटर व अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए मौखिक व लिखित में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाा है। डॉक्टरों की नियुक्ति करना सरकार के अधीन है। - डॉ. शंकरलाल शर्मा, प्रभारी सरकारी अस्पताल सूरतगढ़

भास्कर न्यूज - सूरतगढ़

पूर्व मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया और नए मुख्यमंत्री ने सत्ता संभाल ली। इसके बावजूद स्थानीय सरकारी अस्पताल में बने ट्रोमा सेंटर पर ताला लगा है। वजह, ट्रोमा सेंटर में अभी तक डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। ऐसे में हादसे के शिकार लोगों को अन्यत्र रैफर होने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि नेशनल हाईवे के निकट सरकारी अस्पताल परिसर में दुर्घटनाओं के शिकार लोगों के तत्काल इलाज के लिए 70 लाख रुपए की लागत से बने ट्रोमा सेंटर के भवन का पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गत वर्ष 12 सितंबर को उद्घाटन किया था। तब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में तीन डॉक्टरों, एक कंपाउडर व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की अस्थाई नियुक्ति की थी। दस-पंद्रह दिन से हल्की चोट के रोगियों का ट्रोमा सेंटर में इलाज शुरू था लेकिन जब से विभाग ने डॉक्टरों को वापस अपने मूल पदों पर लगाया है, तब से ट्रोमा सेंटर पर ताला लगा हुआ है। कस्बे के अलावा दूर-दराज से आने वाले हादसे के शिकार लोगों को मजबूरी में जिला या फिर संभाग मुख्यालय पर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।



ट्रोमा सेंटर पर ताला, नहीं हैं डॉक्टर