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केंद्र ही नहीं खुलते तो कैसे मिटेगा कुपोषण जिले में कई जगह पर आंगनबाड़ी केंद्र बंद तो कई जगह नहीं मिला पूरा पोषाहार

7 वर्ष पहले
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भास्कर टीम - भीलवाड़ा
आसींद क्षेत्र के मारवों का खेड़ा में 24 जनवरी को कुपोषण के शिकार बच्चे राजू की मौत हो गई। उसे समय पर पोषाहार या इलाज मिलता तो शायद उसे बचाया जा सकता था। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों व धात्री महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है, लेकिन कई जगहों पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके हैं तो कई जगहों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नहीं मिलती। स्थिति यह है कि वहां जो पंजीकृत बच्चे हैं, उन्हें केंद्रों तक लाने के लिए कार्यकर्ताओं की ओर से कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जो पोषाहार व पंजीरी मिल रही है, उसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों का न तो समय पर वजन होता है, न ही निर्धारित स्वास्थ्य परीक्षण हो पाता है। ऐसे में जो बच्चे कुपोषित है उन्हें भी पर्याप्त मात्रा में पोष्टिक आहार नहीं मिल पाता है। जब आंगनबाड़ी केंद्रों की यह स्थिति है तो बच्चों का पोषण कैसे होगा।




:करेड़ा. सेणुदा के आंगनबाड़ी केंद्र में अस्त-व्यस्त पड़ा पोषाहार।



रेण में भवन जर्जर, भाकलिया में कच्चा

गेंदलिया. रेण व भाकलिया गांव में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र को अब तक स्वयं का भवन नहीं मिल पाया। जिसके चलते आंगनबाड़ी संचालिका विद्यालय परिसर में मिले एक जर्जर व असुरक्षित एक कमरे में आंगनबाड़ी का संचालन करने को विवश है। वहीं भाकलिया में एक किराए के कच्चे मकान में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है। बारिश में पानी आने व फर्श पूरा उखड़ा होने से बच्चों को बिठाने के साथ पोषाहार को सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। इस बारे में आंगनबाड़ी संचालिका व संस्था प्रधान ने उच्च अधिकारियो के साथ सरपंच व सचिव को अवगत कराया गया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।



नहीं मिलता पूरा पोषाहार

जहाजपुर. पालिका क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में ज्यादातर की स्थिति अच्छी नहीं है। कई जगहों पर पूरा पोषाहार ही नहीं दिया जाता तो कई जगहों पर कार्यकर्ताओं का व्यवहार अच्छा नहीं होने से बच्चे वहां नहीं जाते। वार्ड नंबर छह निवासी लाड़देवी जैन बताती हैं कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को पूरा पोषाहार नहीं देती न ही धात्री महिलाओं की समय पर देख-रेख करती है।



:बनेड़ा. देवपुरा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर लटका ताला।

अस्त-व्यस्त पड़ा पोषाहार

करेड़ा. सेणुदा गांव में आंगनबाड़ी केंद्र पर पोषाहार अस्त-व्यस्त पड़ा हुआ है। मंगलवार को दोपहर में केंद्र पर कोई नहीं था। अंदर देखने पर चारों तरफ पोषाहार बिखरा पड़ा था। आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चे नहीं थे। पोषाहार में सीलन आ रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि इस पोषाहार से बच्चों का पोषण होगा या कुपोषण।

दो साल से लटका ताला

बनेड़ा. चमनपुरा ग्राम पंचायत क्षेत्र के देवपुरा गांव में दो साल से आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लटका पड़ा है। यहां दो साल से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का पद रिक्त होने से आंगनबाड़ी केंद्र पर मिलने वाला पोषाहार सहित अन्य सुविधाओं से बच्चों को वंचित रहना पड़ रहा है। इस बारे में ग्रामीणों द्वारा कई बार मांग करने पर भी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

जिले में कई जगह आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं तो कहीं नहीं मिलता पूरा पोषाहार, बच्चों के लाने-ले जाने की भी कोई व्यवस्था नहीं