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गुलाब बाबा के नाम पर बसा गुलाबपुरा

भास्कर न्यूज. गुलाबपुराकस्बे के प्रमुख धार्मिक स्थल गुलाब बाबा की धूणी पर शनिवार को लगने वाले गुलाब बाबा के मेले...

Dainik Bhaskar

Sep 28, 2013, 05:10 AM IST
गुलाब बाबा के नाम पर बसा गुलाबपुरा
भास्कर न्यूज. गुलाबपुरा
कस्बे के प्रमुख धार्मिक स्थल गुलाब बाबा की धूणी पर शनिवार को लगने वाले गुलाब बाबा के मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस मौके पर गुलाब बाबा के मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया गया है। गुलाब बाबा का मेला वर्षों से हर साल आसोज सुदी नवमी को लगता है। बुजुर्गों के अनुसार गुलाब बाबा के नाम से गुलाबपुरा बसा है। मेले में कस्बे सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु दर्शन कर श्रीफल व प्रसाद चढ़ाएंगे। नगरपालिका द्वारा मंदिर पर आकर्षक रूप से सजावट की गई है। मेला परिसर में शुक्रवार से ही दुकानें लगना शुरू हो गई हैं। मेला शुभारंभ पर मंदिर में सुबह पूजा-अर्चना व अभिषेक होंगे। श्रद्धालु बाबा की धूणी के दर्शन कर परिवार की सुख शांति की कामना करेंगे।
३०० साल से जल रही अखंड 'योत
मेवाड़ के अंतिम छोर खारी नदी के तट पर गुलाब बाबा की धूणी आज भी गुलाब बाबा व कस्बे की बसावट की याद दिलाती है। बाबा की धूणी ३०० साल से अनवरत जल रही है। मेले में आने वाले श्रद्धालु बाबा की धूणी के दर्शन कर श्रीफल व प्रसाद चढ़ाते हैं। वैसे तो लोग जन्म, शादी समारोह आदि के मौके पर गुलाब बाबा की धूणी पर धोक लगाना नहीं भूलते।
कौन थे गुलाब बाबा
गुलाब बाबा सिद्धि प्राप्त एक प्रसिद्ध संत थे। जिनका जन्म ५०० साल पहले भिनाय के बाह्मणï परिवार में हुआ था। शुरू में गोपालक होने से उनमें वैराग्य भाव उत्पन्न हो गया। उन्होंने ब्यावर ((अजमेर)) के पास सोपराघाटा में साधना शुरू की। इसके बाद उन्होंने नाथ संप्रदाय की स्थापना की। गुलाब बाबा ने साधना करते हुए खारी नदी के तट पर अपना डेरा जमाया था। उन्होंने सिद्धि प्राप्त कर कई चमत्कार भी दिखाए। किवदंतियों के अनुसार उदयपुर महाराणा फतह सिंह जब आगूंचा चौकी पर आए और उन्होंने धूणी पर आग जलती देखी तो उत्सुकतावश महाराणा बाबा के दर्शन के लिए वहां जा पहुंचे। महाराणा ने सम्मानपूर्वक बाबा को एक दुशाला भेंट किया, लेकिन बाबा ने उसे धूणी में डाल दिया। इस पर महाराणा आग बबूला हो उठे। लेकिन बाबा ने उस धूणी में से एक के बाद एक कई दुशाला निकाल दिए। इस चमत्कार को देखकर महाराणा भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके।
बाढ़ में धूणी पर नहीं चढ़ पाया पानी
कस्बे के 80 वर्षीय बुजुर्ग इंद्रचंद टेलर बताते हैं कि कस्बे में वर्ष 2000 में बाढ़ आ गई थी। हर जगह पानी ही पानी हो गया था। लोग परेशान हो रहे थे। बाढ़ आने के बावजूद धूणी पर पानी नहीं चढ़ पाया। इसके चलते गुलाबपुरा में बहुत कम नुकसान हुआ।
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