जो सरल, वही संत
भास्कर न्यूज - कपासन
जो सरल होता है, वही संत होता है। जिसके मन में संताप नहीं हो, वही महान संत बनते है। आज देश में गो हत्या, अत्याचार और पापाचार तेजी से बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए मनोधर्म अंगीकार कर लोगों को आगे आना होगा।
यह विचार रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश स्वामी रामदयाल महाराज और भीमगौड़ा हरिद्वार के संत हंसदेवाचार्य महाराज ने सांवलिया धाम मुंगाना में स्वामी रामानंदाचार्य महाराज के जयंती महोत्सव पर धर्मसभा में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य रामदयाल महाराज ने ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए ही कली काल में भक्त शिरोमणि रामानंदाचार्य का प्राकट्य हुआ। उन्हें बाल्यकाल में ही भगवान के साक्षात्कार हुए। उन्होंने भारतीय सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा की। उन्होंने कहा कि हमारा रिश्ता इंसान से इंसान का होना चाहिए ताकि सनातन धर्म सुरक्षित रहे। मुख्य अतिथि धर्माचार्य हंसदेवाचार्य महाराज ने कहा कि जो सरल होता है, वहीं संत होता है।
संत की जाति संत ही होती है। देश के युवा चरित्रवान बन जाए तो हम अपने पुराने गौरव को फिर से प्राप्त कर सकते है। कन्या लक्ष्मी का अवतार है पर कुछ लोग इसे गर्भ में ही खत्म करवा देते है। ये एक दिन महाविनाश का कारण बनेगा। इससे पूर्व कस्बे में 151 गांवों की हरिबोल प्रभात फेरी मंडलों का जुलूस निकाला गया। पूरा गांव वृंदावन बना हुआ था। बग्गी में स्वामी रामदयाल व हंसदेवाचार्य महाराज विराजमान थे। आयोजक मुंगाना के महंत चेतनदास महाराज ने हरिबोल प्रभात फेरी मंडलों का स्वागत किया। आश्रम परिसर में बने पांडाल में बांसवाड़ा के संत हरिओम दास के संयोजन में जगदगुरु रामानंदाचार्य के चित्र पर माल्यार्पण कर पूजा, आरती की गई।
> कपासन. सांवलियाधाम मुंगाना में आयोजित कार्यक्रम में संत हंसदेवाचार्य तथा आचार्य रामदयालजी महाराज।