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साइकिल लेकर छोड़ दी पढ़ाई

7 वर्ष पहले
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दीपचंद पाराशर - चित्तौडग़ढ़
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने निशुल्क साइकिल योजना को और विस्तार देते हुए सरकारी स्कूल की नवी कक्षा में आने वाली हर बालिका को साइकिल के लिए चेक दे दिए, पर इनमें से कुछ बालिकाओं ने स्कूल आना बंद कर सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया। जिले में ऐसी बालिकाओं की संख्या 220 है। इससे सरकार के साढ़े पांच लाख रुपए बेकार चले गए।
राज्य में सरकार ने बालिकाओं को निशुल्क साइकिल वितरण योजना 2007-08 में शुरू की थी। तब सरकारी स्कूल में कक्षा नवी पास कर दसवीं में आने वाली उसी बालिका को ही साइकिल दी जाती थी, जिसका घर स्कूल से पांच किमी दूर है। चुनावी साल में उदार हुई सरकार ने चालू सत्र 2013-14 में सरकारी स्कूल की कक्षा नवीं में प्रवेश लेने वाली हर छात्रा को मनपसंद की साइकिल खरीदने के लिए चेक दे दिए। चाहे उसका घर स्कूल के बगल में ही क्यों न हो। इसके तहत जिले में 9127 बालिकाओं को 2500-2500 हजार रुपए के चेक प्रदान किए गए। योजना का लाभ लेने के लिए लगभग सभी बालिकाओं ने चेक की राशि उठाकर साइकिल खरीदने के बिल अपने संस्था प्रधान को सौंप दिए। अलबत्ता इनमें से 220 बालिकाओं ने बाद में स्कूल आना ही बंद कर दिया। इस बात का खुलासा हाल में शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में सूचना एकत्र करने पर हुआ।
इन नोडल केंद्रों के अधीन स्कूलों में छोड़ी पढ़ाई : जिले के नोडल केंद्र निम्बाहेड़ा गल्र्स के अधीन स्कूलों में 20, बॉयज एवं चित्तौडग़ढ़ गल्र्स नोडल केंद्र के अधी स्कूलों में 17-17, भूपालसागर राउमावि केंद्र में 14, बोहेड़ा केंद्र के अधीन 12 बालिकाओं ने पढ़ाई छोड़ी। जिले में 39 नोडल केंद्र में से छह केंद्रों के अधीन स्कूलों में ही साइकिल का चेक लेने वाली शत प्रतिशत बालिकाएं अध्ययनरत है। शेष सभी नोडल केंद्र के अधीन किसी न किसी बालिका ने स्कूल आना बंद कर दिया।