गादोला बना गोकुलधाम
भास्कर न्यूज - निम्बाहेड़ा
गादोला में आयोजित गो-कथा का समापन उल्लास मय माहौल में हुआ। इस दौरान गादोला जैसे गोकुल बन गया। आचार्य देवकृष्ण शास्त्री के सानिध्य में पंचकुंडीय यज्ञ के साथ गोशाला का भूमि पूजन किया गया। नीमच गोशाला के अध्यक्ष एवं एडवोकेट प्रवीण मित्तल सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।
यज्ञ में सरपंच नौसर बाई जाट एवं उनके पति राजाराम 51 हजार रुपए की बोली लगाकर यजमान के रूप में बैठे। उनके अलावा 24 जोड़े शामिल हुए। इससे पूर्व बैंडबाजों के साथ निकाली गई कलश यात्रा में ग्रामीण उमड़ पड़े।
कथा के दौरान शास्त्री ने कहा कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवता निवास करते हैं। जो गाय की सेवा करता है, उसे तीर्थयात्रा, हवन कराने की जरूरत नहीं है। मनुष्य जीवन में मां बालक को एक या दो वर्ष ही दूध पिलाती है लेकिन गोमाता जीवन पर्यन्त मनुष्य को दूध पिलाती है।
आसपास के 10 गांवों के लोगों को मिलाकर गोशाला सेवा समिति भी बनाई। अध्यक्ष लख्मीचंद मालवीय, उपाध्यक्ष सीताराम गायरी, सचिव चांदमल कुमावत, कोषाध्यक्ष गोटीलाल सालवी के अलावा सहसचिव श्यामलाल शर्मा को मनोनीत किया गया। गुरुवार को भी गोशाला के लिए दान राशि एवं अनाज आने का सिलसिला जारी रहा। छह लाख नकद, 20 क्विंटल अनाज प्राप्त हुआ। कई किसानों ने गोशाला के लिए घास एवं सुखले की घोषणा की। कथा समापन पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने गोरक्षा का संकल्प लिया। गो आरती के साथ गो कथा का समापन हुआ। गोकथा के अंतिम दिवस पर लख्मीचंद पुत्र रूपा मालवीय ने गोशाला के लिए 50 लाख की कीमत वाली पांच बीघा एक बिस्वा खेत की जमीन ट्यूबवेल सहित दान कर दी। कारीबाई पत्नी स्व. भेरूलाल रावत पूर्व सरपंच ने दस लाख रुपए का एक बीघा खेत दान किया। सीताराम गायरी पुत्र हेमराज गायरी ने चारा गोदाम बनाने के लिए आठ लाख रुपए की घोषणा की। काशीबाई पत्नी उदा कुमावत ने गोशाला में एक लाख एक हजार एक रुपए तथा भवानीराम पुत्र भारमल रावत ने गौशाला में एक ट्यूबवेल एवं 11 हजार रुपए देने की घोषणा की। इसी प्रकार आस-पास के ग्रामीणों एवं गोभक्तों ने इस निमित नौ लाख 51 हजार रुपए की घोषणा हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पांच हजार, 11, 21 व 51 हजार रुपए की राशि दान की। इस प्रकार कुल 80 लाख रुपए की लागत की जमीन एवं नकदी का दान गोशाला के लिए आचार्य देवकृष्ण शास्त्री के सानिध्य में एकत्र हुआ।
> निम्बाहेड़ा. गादोला में आयोजित गो कथा के समापन पर गाय की आरती उतारते श्रद्धालुगण।