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हिरणों को बच्चों की तरह प्यार करता था शैतानसिंह
भास्कर न्यूज - फलौदी
हिरण से बच्चों की तरह प्यार करने वाला ननेऊ गांव का शैतानसिंह विश्नोई मंगलवार को देर रात अपने घर पहुंचा था। इसके कुछ देर बाद क्षेत्र में शिकारियों के आने की भनक लगी तो वह अपने भाई के साथ तत्काल उनका पीछा करने के लिए दौड़ पड़ा। बाद में घरवालों को पता लगा कि शैतान को गोली लग गई है। इससे घर में कोहराम मच गया। एक तरफ परिजनों को गर्व था कि शैतानसिंह ने हिरणों को बचाने के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की। दूसरी तरफ, उसके मासूम बच्चों की मनोस्थिति देख परिजनों का कलेजा मुंह को आ रहा था। किसी तरह घर के मुखिया अर्जुनराम अपने एक साल के मासूम
पोते को संभाल रहे थे, वहीं अन्य ग्रामीण पूरे परिवार को ढांढस बंधा रहे थे।
ननेऊ गांव के धोरों पर बुधवार को
सुबह से शुरु हुआ धरना देर शाम बाद उस समय खत्म कर दिया गया, जब कलेक्टर गौरव गोयल और एसपी ((ग्रामीण)) नितिनदीप ब्लग्गन ने ग्रामीणों की बात को सरकार तक पहुंचाया। सरकार से शैतानसिंह को मरणोपरांत शौर्य पुरस्कार दिलाने के लिए जिला प्रशासन को जल्द ही प्रस्ताव भेजने को कहा है। कलेक्टर गोयल ने बताया कि आमतौर पर सेना में ही शौर्य पुरस्कार दिया जाता है, लेकिन पर्यावरण और वन्यजीव की रक्षार्थ प्राणों की आहुति देने वालों को भी यह सम्मान दिया जाता है। इससे पहले 12 अगस्त 2000 को भी चेराई के गंगाराम को वन्यजीव की रक्षा करने के लिए यह सम्मान दिया गया था। साथ ही शैतानसिंह के दो मासूम बच्चों के भविष्य को देखते हुए 12वीं तक पढ़ी उसकी पत्नी को अनुकंपा नौकरी भी दिलाने का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। इस पूरे प्रकरण के बारे में जानकारी मिलने के बाद
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दोनों प्रस्ताव मांगने के साथ ही स्वप्रेरणा से पांच लाख रुपए की अवार्ड राशि भी देने की घोषणा की है।
शैतानसिंह को मिलेगा शौर्य पुरस्कार
देर रात घर लौटने के कुछ देर बाद ही शिकारियों को पकडऩे के लिए निकल पड़ा था वन्यजीव व पर्यावरण प्रेमी को शौर्य पुरस्कार दिलाने पर राज्य सरकार की सहमति