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मावठ बनकर गिरीं बूंदें

8 वर्ष पहले
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चूरू. लंबे इंतजार के बाद बुधवार को खेतों में अमृत धारा झरी। पानी की कमी के चलते दम तोड़ रही बारानी फसलों के लिए बारिश की बूंदें नया जीवन लेकर आई । अधिकतर क्षेत्रों में हल्की व मध्यम दर्जे की बरसात से किसानों के चेहरों पर भी रौनक लौट आई। जिले में रबी की बुआई के बाद से अब तक बारिश नहीं होने से खेतों में लहलहाती फसलें मुरझाने लगी थी। नए वर्ष की शुरूआत में पाला पडऩे से फसलों को नुकसान हुआ। कई इलाकों में चने व सरसों की फसल झुलस गई। किसान रबी के उत्पादन को लेकर चिंतित थे। पिछले चार-पांच दिन से बादलों की आवाजाही होने से किसानों को मावठ की उम्मीद बंधी। बुधवार को सुबह व दोपहर के समय बरसात ने इसे पूरा कर दिया। सिंचित क्षेत्र की फसलों में अब पानी नहीं देना पड़ेगा। बारानी क्षेत्र में चने की फसल की बढ़वार तेजी से होगी और उत्पादन बढ़ेगा। किसानों ने बताया कि पछेती फसलें अभी बढ़वार पर चल रही है। मावठ से गेहूं, जौ, सरसों व अन्य फसलों की बढ़वार तेजी से होगी। जमीन में नमी रहने फसलों पर पाले की मार भी कम होगी।