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स्वतंत्रता सेनानी मोमनराम बगडिय़ा का निधन

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - भादरा
गांव भांगवा में शुक्रवार देर रात स्वतंत्रता सेनानी मोमनराम बगडिय़ा का निधन हो गया। वे ९४ वर्ष के थे। बगडिय़ा आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। शनिवार दोपहर गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। वे अपने पीछे पत्नी कमला, पुत्र दरियासिंह, पुत्री धर्मों, राजो सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। बगडिय़ा द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अंग्रेजों की सेना में भर्ती हुए और बाद में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। नेताजी के साथ अंग्रेजों से लोहा लेते हुए सन १९४२ में अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था। इसके बाद वे चार साल लापता रहे, ये चार वर्ष उन्होंने अंग्रेजों के विभिन्न शिविरों और जेलों में गुजारे। बाद में सन १९४६ में उन्हें अंग्रेज सरकार ने रिहा कर दिया। देश के तात्कालिक गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने ऐसे सैनिकों को ८२ नंबर फार्म दिए, जिससे उन्हें आजाद-हिंद फौज के सिपाहियों के रूप में पहचाना जा सके। मोमनराम बगडिय़ा को आजादी की २५वीं वर्षगांठ पर तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्र-पत्र देकर सम्मानित किया था। बगडिय़ा के चचेरे भाई पूर्व सैनिक बलवंत बगडिय़ा ने बताया कि सन १९४२ में घर से द्वितीय विश्वयुद्ध की लड़ाई में गए। अंग्रेजों की जेल से छूटकर घर आए तो कुछ दिन बाद ही उनकी शादी कर दी गई।




स्वतंत्रता सेनानी मोमनराम बगडिय़ा ((फाइल फोटो))

भादरा. स्वतंत्रता सेनानी को गार्ड ऑफ ऑनर देते भिरानी पुलिस के जवान।