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घाटे की राह पर दौड़ती ग्रामीण परिवहन सेवा

8 वर्ष पहले
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उमेश शर्मा क्च करौली
जिला मुख्यालय पर 18 दिसंबर 2012 से शुरू हुई मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना डग्गेमार वाहनों के चलते घाटे की राह पर दौड़ती नजर आ रही है। ग्रामीण परिवहन बस सेवा में गत वर्ष में लगभग एक करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है। इसकी भरपाई बीजीएफ के माध्यम से की जाएगी। कई बार शिकायतों के बावजूद पुलिस व प्रशासन डग्गेमार वाहन चालकों को रोकने में निष्क्रिय साबित हो रहे है तो ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण परिवहन की बसों को लेकर जाने में चालक-परिचालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला मुख्यालय पर एक वर्ष पूर्व तत्कालीन परिवहन मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल ने ग्रामीण परिवहन सेवा को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया, लेकिन एक वर्ष बाद भी ग्रामीण परिवहन बस सेवा को डग्गेमारी की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। डग्गेमार वाहन चालक रोडवेज बस स्टैंड के अंदर व बाहर से ही सवारियों को भरकर ले जा रहे है।
सात रूटों पर 20 बसें
योजना के आरंभ में जिला मुख्यालय पर 22 बसें संचालित की गई। इनमें से 20 बसे करौली-मासलपुर-मंडरायल के सात रूटों पर चल रही है। वहीं दो बसों के अतिरिक्त रखा गया है। इसके अतिरिक्त अन्य बसें जल्द ही मिल सकती हैं।
डग्गेमार वाहनों के चलते प्रतिदिन मात्र 4 हजार लोग ही ग्रामीण परिवहन सुविधाओं का लाभ उठा पा रहे है। अगर डग्गेमार वाहन बंद हो जाए तो यात्रियों की संख्या दुगनी से अधिक हो जाएगी, लेकिन पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता के चलते इन पर अंकुश लगाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
नहीं बन पाया वर्कशॉप
जहां एक और करौली आगार पर वर्कशॉप बनकर तैयार है, लेकिन स्टाफ व संसाधनों के अभाव के चलते उसे चालू कराया नहीं जा सका है। वैसे ही एक साल गुजर जाने के बाद भी ग्रामीण परिवहन बस सेवा का भी कोई वर्कशॉप नहीं बना है। इससे बस चालक व परिचालक को काफी परेशानी हो रही है।
अब शीघ्र ही हिंडौन से नादौती व टोडाभीम के लिए भी शीघ्र ग्रामीण परिवहन सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके लिए हरी झंडी मिल गई है और सर्वे जारी है। जनवरी माह में हिंडौन में भी ग्रामीण लोग परिवहन बस सेवा शुरू होने की आस लगाए बैठे हैं।