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अपना अस्तित्व खोती करौली की विरासतें

8 वर्ष पहले
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सुखदेव डागुर - करौली
जिले में प्राचीन ऐतिहासिक अनमोल धरोहर संरक्षण के अभाव में दिनों-दिन अस्तित्व खोती जा रही हैं। स्थापत्य बेजोड़ कला को समेटे हुए पुरातनकाल की ये धरोहरें प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपना वजूद कायम नहीं कर पा रही हैं। पर्यटन व पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते जर्जरावस्था पर आंसू बहाकर खंडहर में तब्दील होकर अपनी हकीकत बयां कर रही हैं। जिले की प्राचीन ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहर ((विरासतों)) को अगर पूर्ण रूपेण संरक्षण मिले तो जिले में पर्यटन विकास को बढा़वा मिलने की विपुल संभावनाएं हैं।
पर्यटन महत्व के बाहुल्यता के साथ क्षेत्र में पूरा वैभव लिए करौली रियासत पहले से ही ऐतिहासिक, धार्मिक,वन्य जीव व प्राचीन स्थलों की संरक्षा व सुरक्षा के लिए पहचानी जाने वाली प्राचीन रियासतों में एक थी, मगर सरकार की उदासीनता व प्रशासिनक अनदेखी के चलते आज ये विरासतें अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही हैं। हालांकि जिले के कैलादेवी, मेंहदीपुर बालाजी, मदन मोहनजी व श्रीमहावीरजी धार्मिक स्थलों ने अपनी प्रसिद्धता के बलबूूते पर्यटन मानचित्र पर जगह बना ली है, मगर पर्यटन विभाग की उदासीनता से जिले में पर्यटकों को नहीं लुभाया जा सका है।
जिले में मुख्यत: तिमनगढ़ का किला, मंडरायल दुर्ग, ऊंट गिरि दुर्ग, देव गिरि, बहादुरपुर किला, रामठरा किला, नारौली डांग किला, दरगाह कबीरशाह, रावल पैलेस ((राजमहल)), शाही कुंड, रणगवां तालाब, अंजनी माता मंदिर, करसाई के जंगलों में प्राचीन बंगला व माला, हिंडौन में प्रहलाद कुंड, नृसिंह मंदिर, हिरण्यकश्यप का महल,जगर स्थित कुण्डेवा, दानघाटी, ढिंढोरा की बावड़ी व बारहखंभा, सूरौठ का किला, मोरध्वज की नगरी गढ़मोरा किला, पदमपुरा किला, मासलपुर क्षेत्र में तिमनगढ़ के साथ ही ननद भौजाई का कुआं, कैलादेवी नटनी की छतरी व कई छतरियां एवं कैलादेवी वन्य जीव अभयारण्य के वृहद दायरे में महेश्वराय की खोह, खुडका की खोह, राहिर की खोह, कंदरा गुफाएं, कसेड की खोह,केदार गिरि की गुफा, कैरी उमर, धमनियां की खोह सहित कई दर्जनों ऐसे प्राकृतिक एवं मनोरम स्थल हैं, जिनको देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने अपना सबकुछ इन्हीं स्थानों पर न्योछावर कर दिया हो। ये निर्जन स्थल पर्यटक प्रेमियों को अपलक निहारने पर विवश कर देते हैं। इसके अलावा करौली में पर्वतीय हरियाली का वैभव, ऐतिहासिक किले, महल व झरने तथा बांधों में नौका विहार व पक्षियों का कलरव पर्यटकों को स्वत: ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
पर्यटन की विपुल संभावना
जिले के प्रसिद्ध चारों धार्मिक स्थल कैलादेवी, मदनमोहनजी, श्रीमहावीरजी व मेंहदीपुर बालाजी में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए जिले में पर्यटन को पंख लग सकते हैं। पर्यटन व पुरातत्व विभाग इन जर्जर ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ विकास की पहल करे तो यहां पर्यटन विकसित होने की विपुल संभावना बनती हैं। पर्यटन को बढावा मिलने से पर्यटन मानचित्र पर जिला प्रदर्शित होगा वहीं क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित होंगे।
कैसे मिले बढ़ावा
जिले में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए शासन, प्रशासन के साथ कला एवं संस्कृति विभाग, पर्यटन व पुरातत्व विभाग को इन ऐतिहासिक तीर्थ स्थल व प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के साथ ही आधुनिकतम ढंग से मरम्मत कर मूर्तरूप देने की आवश्यकता है, वहीं जिले के बीहड़ व डांग क्षेत्रों में स्थापित इन धरोहर स्थलों को आपस में संपर्क सड़क से जोडऩे व आवागमन के सुलभ साधन मुहैया कराने, पुलिस द्वारा राज्य स्तर पर दस्यु मुक्त जिला होने की छवि प्रदर्शित करने के साथ ही जिले को रेल लाइन से जोड़ा जाना जरूरी है। इसके अलावा क्षेत्रीय लोगों को भी इन धरोहरों को गौरव मानकर इनकी सुरक्षा करने का संकल्प लेना होगा, साथ ही अतिथि देवो भव: की परंपरा का निर्वहन कर इतिहास के गवाह इन स्मारक, धरोहर व संपदाओं का संरक्षण का दायित्व आमजन को निभाना ही होगा।