डांग में नहीं रुक रहा बारूद का खेल
उमेश शर्मा - करौली
वैसे तो करौली जिले को डांग की रानी के नाम से जाना जाता है, लेकिन इस डांग क्षेत्र की व्यथा बहुत पुरानी और दर्द भरी है। इस डांग क्षेत्र ने कई मासूम सुहागिनों के मांग का सिंदूर उजाड़ दिया तो कइयों ने बेरोजगारी व आपसी क्लेश से तंग आकर डांग का दामन थाम हाथों में बंदूक उठा ली, जिसे आज तक कोई भली भांति नहीं समझ पाया है। डांग क्षेत्र होने के कारण यहां पर सर्वाधिक रूप से दस्यु समस्या व्याप्त है तो अवैध खनन की मार भी यह डांग क्षेत्र झेलता आ रहा है लेकिन इन दोनों के लिए काम आने वाले बारूद के खेल में बारूद कहां से, कब और कौन लाता है, इससे दशकों बाद भी पुलिस अनभिज्ञ बनी हुई है।
आए दिन पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने वाले बदमाशाों के पास कई तरह के देशी और विदेशी हथियार पकड़े जाते है तो सैकड़ों की संख्या में कारतूस बरामद किए जाते हैं। वहीं अवैध खनन में काम आने वाले विस्फोटक को इन उपयोगकर्ताओं को कौन लाकर दे रहा है। पुलिस भी अभी तक इस बात का पता नहीं लगा सकी है। यही कारण है कि कोई भी व्यक्ति तमंचे की नोक पर पुलिस बेड़े को नचाता सा नजर आता है, लेकिन पुलिस है कि इन हथियार सप्लाई करने वालों की गुत्थियों के पेंच को सुलझा नहीं पा रही है।
तीन वर्ष में पकड़े हथियार
जिला पुलिस द्वारा दस्यू उन्मूलन अभियान, बदमाशाों की धरपकड़ का अभियान आदि चलाकर कई बड़े-बड़े तीस मारखाओं को हवालात की हवा खिलाई है, लेकिन इन तीस मारखाओं के पास हथियार इतनी तादाद में कहां से आए, इसका अभी तक पुलिस सुराग नहीं लगा पाई है और अगर पुलिस को इन हथियार सप्लायर के बारे में पता है तो अभी कार्रवाई नहीं की है। पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने वर्ष 2010 में 41 अवैध हथियार अलग-अलग मामलों में बदमाशों से बरामद किए। इनमें 26 देशी कट्टे, 6 पचफेरा, 5 पिस्टल जिनमें से एक इंग्लैंड व चार भारत निर्मित, 4 देशी बंदूक बरामद की। इसी प्रकार वर्ष 2011 में 30 देशी कट्टे, 7 पचफेरा, 10 पिस्टल, 4 देशी बंदूक सहित 200 से अधिक कारतूस बरामद किए। वर्ष 2012 में 25 देशी कट्टे, 7 पचफेरा, 2 पिस्टल, 7 देशी बंदूक सहित लगभग 427 कारतूस व वर्ष 2013 में 63 देशी कट्टे, एक रिवाल्वर देशी, 7 पिस्टल देशी, एक पचफेरा देशी, पांच बंदूकों सहित 250 से अधिक कारतूस बरामद किए। इनमें भी जून 2013 तक पुलिस ने 14 देशी कट्टे, 3 पचफेरा, 3 पिस्टल, 4 देशी बंदूक व एक थ्री नोट थ्री बरामद की।
वहीं नवम्बर 2013 में पुलिस ने नादौती के गोट्या का पुरा से दुकान की आड़ में अवैध हथियारों की बिक्री करने वाले पृथ्वीराज मीणा के यहां से 10 पिस्टल व एक बंदूक बरामद की और उसी की निशान देही पर मंडावरा फाटक के पास एक महिला से 19 देशी कट्टे भी बरामद किए गए। इसका खुलासा होने पर पता चला की चुनावों के चलते हथियारों की मांग की गई थी, जिसके लिए इतने हथियार मंगाए गए। वहीं जल्द ही लोकसभा चुनाव भी होने जा रहे हैं। विधानसभा चुनावों में हथियारों की मांगों को देखते हुए लोकसभा चुनाव में हथियारों की मांग पहले से अधिक हो सकती है।
खनन व्यापारी मंगाते हैं बारूद
गौरतलब बात तो यह है डांग क्षेत्र में केवल पत्थर ही व्यापार है, जो बेरोजगारों को रोटी-कपड़े की सुविधा उपलब्ध करा पाता है। लेकिन खनन में भी विस्फोटक सामग्री के बिना खनन कर पाना संभव नहीं है। इसके लिए कई बड़े व्यापारी अवैध रूप से विस्फोटक मंगाते हैं, और खनन कार्य कर रहे हंै, लेकिन पुलिस इसका भी पता नहीं लगा पाई है कि इन व्यापारियों के पास अवैध विस्फोटक कहां से आता है।
॥पुलिस अवैध हथियारों का उपयोग करने वाले बदमाशों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रही है। जिले में अवैध हथियार प्रमुख रूप से मध्यप्रदेश की ओर से आते है। वहां की पुलिस इन अपराधियों को गिरफ्तार करती है और हम भी ऐसे अपराधियों को चिह्नित कर कार्रवाई अमल में लाएंगे।
योगेश यादव, पुलिस अधीक्षक, करौली
चुनावों के समय बढ़ जाती है आम्र्स की मांग
डकैतों के पास कारतूसों की भरमार
यूं तो डकैत पुलिस के खौफ के कारण डांग क्षेत्र में दुबे-दुबे घूमते है तो कभी पुलिस के खौफ को चुनौती देते हुए शहरों की तरफ भी रुख कर लेते है, लेकिन डकैतों के पास पुलिस नाकाबंदी होने व गश्त होने के बावजूद अच्छी किस्म के हथियारों सहित भारी तादात में कारतूस मिलना पुलिस महकमे के कुछ कर्मचारियों की निष्क्रियता को साफ जाहिर करता है।
गत दिवस डकैत रामकुमार मीणा सहित उसकी गैंग के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक पचफेरा 315 बोर, एक 12 बोर राइफल व एक 315 बोर का देशी कट्टे के साथ 86 जिंदा कारतूस व 11 खाली खोखा जब्त किए थे। वहीं डकैत हरिया व धतूरिया गैंग व उसके साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक पचफेरा, एक 12 बोर बंदूक व 26 कारतूस उनके कब्जे से बरामद किए थे। इसी प्रकार कोतवाली पुलिस ने मुकदमा नंबर 435/12 में डांग क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने 25 हजार रुपए के इनामी डकैत भंवर मीणा व उसके भाई भजन मीणा, अमरचन्द, जीवन, गंगाराम, नरेश, विजेंद्र, हरफूल को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 5 पचफेरा, 134 जिंदा व 4 खाली कारतूस बरामद किए। करणपुर थाने में मुकदमा नंबर 14/12 में हरिसिंह उर्फ हरिया पुत्र सौवरन गुर्जर, रामवीर पाटीन, केदार मीणा, जगमोहन मीणा, रामेश्वर गुर्जर को गिरफ्तार कर हथियारों सहित 173 जिंदा कारतूस व 50 खाली खोखे बरामद किए। वर्ष 2011 में मासलपुर में मुकदमा नंबर 174/11 रामदास गुर्जर व सुरेश गुर्जर को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से हथियार सहित 42 जिंदा कारतूस, महावीरजी में मुकदमा नंबर 162/2011 मूल. धर्मसिंह उर्फ पप्पन गुर्जर को गिरफ्तार कर हथियार सहित 50 कारतूस बरामद किए। वर्ष 2013 में मासलपुर थाने में मुकदमा नंबर 54/13 में रामलखन गुर्जर को मय साथियों के साथ गिरफ्तार कर उनके कब्जे से हथियारों सहित 64 कारतूस बरामद किए गए।
कैसे रुके अपराध
अवैध हथियारों की रोकथाम पर अंकुश लगाने में पुलिस नाकाम, सप्लायर अब
भी पुलिस गिरफ्त से बाहर, अपराधियों के पास मिलते हैं आधुनिक हथियार