- Hindi News
- विद्वानों ने फारसी के महत्व को किया प्रतिपादित
विद्वानों ने फारसी के महत्व को किया प्रतिपादित
कासं - टोंक
अरबी फारसी शोध संस्थान में तीन दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार के दूसरे दिन देश के कई हिस्सों से आए विद्वानों ने अपने अपने पत्र वाचन कर फारसी के महत्व एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उसकी आवश्यकता को प्रतिपादित किया। सेमिनार में किसी ने शहरे बिजनौर में फारसी के योगदान पर प्रकाश डाला तो किसी ने तारीखे अवध को बयां किया। हिंदुस्तानी की शाही शादी एवं रस्मों रिवाज की रोशनी में फारसी के अहमियत को प्रतिपादित किया। राजस्थान की मस्जिदों में प्राप्त फारसी भाषा के लेख का जिक्र करते हुए फारसी को ऐसी भाषा बताया जिसको पढ़कर एवं जानकर हिंदुस्तान के इतिहास को करीब से जाना जा सकता है। सेमिनार में भारतीय इतिहास के संरक्षण में सिक्कों एवं कैलीग्राफी का योगदान सहित फारसी स्रोत के महत्व विषय पर कई विद्वानों ने रोशनी डाली। दिल्ली यूनिवर्सिटी की मसर्रत फातेमा जाफरी, अलीम अशरफ, रेहाना खातून, रजा लाइब्रेरी रामपुर यूपी के डायरेक्टर एसएम अजीजुद्दीन हुसैन, बाबा ए उर्दू प्रो. एएफ उस्मानी, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के डा. हसनैन अख्तर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली के डा. मुफ्ती मोहम्मद मुश्ताक, इख्तिेदान हुसैन सिद्दीकी, प्रो. कमर गफ्फार, उदयपुर की डा. सरवत जहां, अलीगढ यूनिवर्सिटी के प्रो. आजर, डॉ. मोहम्मद एहतेशामुद्दीन, डॉ. कमर आलम, आदि ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया।